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गुरुवार, 06 मई, 2004 को 10:31 GMT तक के समाचार
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कांग्रेस के लिए कठिन भोपाल की राह

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उमा भारती
उमा भारती पिछली बार भोपाल से जीती थीं और उन्हें 56 फीसदी वोट मिले थे
राजा भोज ने ग्यारहवीं सदी में शहर भोजपाल बसाया था. उसी को अब भोपाल के नाम से जाना जाता है.

देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य मध्यप्रदेश की राजधानी है.

पिछले एक दशक में इस संसदीय सीट के लिए हुए सारे आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का ही बोलबाला रहा है और कांग्रेस इस क्षेत्र की दूसरी बड़ी पार्टी के तौर पर उसे टक्कर देती रही है.

पिछली बार इस सीट से मुख्यमंत्री उमाभारती, कांग्रेस के सुरेश पचौरी को हराकर सांसद बनीं थीं.

इस बार भी यहाँ आम चुनाव में मुक़ाबला भारतीय जनता पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी और कांग्रेस के साजिद अली के बीच है.

समाचार माध्यमों और पार्टी कार्यालयों को छोड़कर पूरे भोपाल में राजनीतिक माहौल थोड़ा ठंडा ही है बल्कि शादियों का माहौल चुनाव से ज़्यादा गरम और आकर्षक दिखता है.

खुद कैलाश जोशी भी इन शादियों में मध्यप्रदेश के पकवानों का मजा ले रहे हैं.

जोशी इन चुनावों को लेकर आश्वस्त नज़र आते हैं और दावा करते हैं, "यहाँ तो हमारी जीत निश्चित है, हर ओर भारतीय जनता पार्टी की हवा है, हम भोपाल क्या मध्यप्रदेश की 29 की 29 सीटें जीतेंगे."

इसकी वजह शायद ये भी हो सकती है कि प्रतिद्वंदी उम्मीदवार साजिद अली पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं जबकि कैलाश जोशी राजनीति के बहुत पुराने खिलाड़ी हैं.

वोट का अंतर

साजिद अली की भाजपा को हरा पाने के लिए तैयारियाँ इतनी जबरदस्त नहीं हैं कि वो कांग्रेस को पिछले चुनावों में मिले लगभग 28 प्रतिशत वोट को 50 प्रतिशत तक पहुंचा सकें.

दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए भी इस सीट पर कांग्रेस नहीं जीत पाई थी

1999 के चुनाव में भोपाल में भाजपा विजयी हुई थी और इसे लगभग 56 प्रतिशत वोट मिले थे.

1984 के बाद कांग्रेस इस सीट पर कभी विजयी नहीं हुई है.

साजिद अली शायद भोपाल की जनता को किए गए चुनावी वायदों जैसे भोपाल हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने और फ्लाई ओवर के जाल बिछा देने से आश्वस्त हैं.

इसीलिए उनके कार्यकर्ता दिन के साढ़े ग्यारह बजे चुनाव प्रचार में निकल रहे हैं तो वह ख़ुद इलेक्ट्रानिक रेजर से दाढ़ी बनाने में व्यस्त.

भाजपा के अलावा कांग्रेस को यहाँ आंतरिक कलह से भी लड़ना है जो इस हद तक है कि कुछ कांग्रेस विधायकों को साजिद अली के चुनाव प्रचार में भेजने के लिए खुद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को बीच बचाव करना पड़ा.

सामाजिक गणित

साथ ही यहां बहुजन समाज पार्टी ने भी अपना उम्मीदवार खड़ा किया है जो कांग्रेस के वोटों में ही सेंध लगाएगी.

साजिद अली भोपाल के साढ़े चार लाख मुस्लिम मतदाताओं पर दाँव लगा रहे हैं.

लेकिन उनके कार्यकर्ता इस तरह के गणित को गलत बताते हैं और कहते हैं कि कांग्रेस के साथ लगभग 2 लाख यादव, कायस्थ और जैन समाज के वोटर भी हैं.

इसके बावजूद भोपाल संसदीय क्षेत्र के कुल 18.5 लाख मतदाताओं के बीच जीत के लिए यह चुनावी गणित आसान नहीं है.

हालांकि अली कहते हैं कि "मेरे लिए जोशी का बुजुर्ग होना बेहतर साबित हो रहा है. वो जीत के लिए आश्वस्त है, बड़े नेता हैं, इसीलिए सबसे मिल भी नहीं रहे जबकि मैं अब तक डेढ़-दो लाख लोगों से मिल चुका हूँ."

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