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चुनावों के कुछ रोचक तथ्य | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस बार चौदहवीं लोकसभा के चुनाव हो रहे हैं. हर बार की तरह इस बार के चुनाव भी अलग हैं. लेकिन हर चुनाव कोई न कोई रोचक तथ्य इतिहास के पन्नों में छोड़ जाता है. कुछ ऐसे ही रोचक तथ्य - 1988 में मेघालय विधानसभा में दो उम्मीदवार रोस्टर संगमा और चेम्बर लाईन मार्क को बराबर वोट मिले थे, लेकिन चुनाव अधिकारी संगमा को विजयी घोषित किया. क्योंकि चुनाव अधिकारी ने फैसला करने के लिए टास किया जो संगमा के हक में निकला. मायावती की बहुजन समाज पार्टी और अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश की रिपब्लिकन पार्टी का चुनाव चिन्ह हाथी एक ही है. इलेक्ट्राँनिक वोटिंग मशीनों का प्रयोग पहली बार केरल राज्य में हुआ था, एक वोटिंग मशीन में अधिक से 64 उम्मीदवार के चिन्ह शामिल किए जा सकते हैं लेकिन अगर उम्मीदवारों की तादाद ज़्यादा हो तो फिर वोटिंग बैलेट पेपर के द्वारा होगी. 1996 के विधानसभा चुनावों में तमिलनाडु के एक चुनावी क्षेत्र एक हजार तेंतीस उम्मीदवार मैदान में थे जो एक रिकाँर्ड है- मोडा करोची नाम के इस क्षेत्र में बैलेट पेपर एक पुस्तिका की शक्ल में जारी किया गया था. पी.वी. नरसिम्हा राव देश के ऐसे एकमात्र प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने एक बार महाराष्ट्र राज्य से भी चुनाव जीता था. उनके चुनाव क्षेत्र का नाम था रामटेक. हालांकि जब वे प्रधानमंत्री थे तो वे आँध्र प्रदेश का ही प्रतिनिधित्व कर रहे थे. मिज़ोरम, सिक्किम और मेघालय से सिर्फ एक-एक ही सांसद चुनकर लोकसभा में आते हैं. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मंसूर अली ख़ान पटौदी ने 1971 में विशाल हरियाणा पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. वे अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के पति हैं और अभिनेता सैफ़ अली ख़ान के पिता. 1957 में अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था. लखनऊ में वे हार गए, मथुरा में उनकी ज़मानत जब्त हो गई थी लेकिन बलरामपुर से वह जीत गए थे.
1977 में हिंदी फिल्मों के जाने-माने अदाकार देवानंद ने इंदिरा गांधी के विरोध में एक राष्ट्रीय दल का गठन किया था. पार्टी के गठन के समय मुंबई के शिवाजी पार्क में एक ज़बर्दस्त रैली भी आयोजित की गई थी जिसमें जाने-माने क़ानूनविद् नानी पालकीवाला और विजय लक्ष्मी पंडित भी उपस्थित हुए थे. लेकिन देवानंद की वह पार्टी एक माह के अंदर ही गुमनाम होकर रह गई और आम चुनावों में उसका कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा. काका जोगेन्दर सिंह जो धरती पकड़ के नाम से भी मशहूर थे 25 बार चुनाव हारे. धरती पकड़ वी.पी.सिंह और राजीव गांधी जैसे बड़े-बड़े नेताओं के ख़िलाफ़ भी उम्मीदवार रहे जिनके लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए जाते थे ताकि कहीं उनकी मौत की वजह से चुनाव रद्द न कर दिया जाए. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे मात्र नेता हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश और दिल्ली राज्यों से लोकसभा के चुनाव में कामयाबी हासिल की. देश के पहले चुनावों के लिए गोदरेज कम्पनी ने 17 लाख बैलेट बॉक्स बनाए थे और एक बॉक्स के बदले में सरकार ने पांच रुपए का भुगतान किया था. श्रीमती इंदिरा गांधी ने 1977 में अपने ख़िलाफ़ जनता पार्टी के गठबंधन को बेमेल खिचड़ी कहा था और बाद में जब जनता पार्टी चुनाव में जीत गई तो उसने अपनी विजय के जश्न में कई स्थानों पर खिचड़ी बंटवाई थी.
1999 में मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में पहली बार एक किन्नर ने जीत हासिल की थी. लक्षद्वीप देश का सबसे छोटा चुनावी क्षेत्र है जहां सिर्फ 36 हजार मतदाता हैं. चुनावी प्रचार के लिए पहली बार जो फ़िल्म बनाई गई थी उसका नाम था 'पंडित नेहरूस मैसेज' यानी पंडित जवाहरलाल नेहरू का पैगाम. उस फिल्म के निर्देशक मीनू मसानी थे. इंदिरा गांधी के पति फ़िरोज गांधी नेहरू गांधी परिवार के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1952 में रायबरेली से चुनाव लड़कर कामयाबी हासिल की थी. 1984 के आम चुनावों में मतदाताओं ने सबसे ज़्यादा अपने मताधिकार का प्रयोग किया था जिसमें 63.3 फ़ीसदी वोट पड़े थे. |
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