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रविवार, 25 अप्रैल, 2004 को 00:11 GMT तक के समाचार
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बुख़ारी भी बीजेपी के पक्ष में झुके

इमाम सईद अहमद बुख़ारी
बुख़ारी ने कहा कि काँग्रेस समेत धर्मनिरपेक्ष पार्टियों पर कोई विश्वास नहीं रहा
दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सईद अहमद बुख़ारी ने मुसलमानों को हिदायत दी है कि वे इस आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करें और उसको मौका दें.

बीबीसी हिंदी के साथ एक विशेष बातचीत में ये कहकर उन्होंने सबको चौंका दिया है.

पिछले चुनावों में वे मुसलमानों से काँग्रेस पार्टी और कुछ अन्य उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की अपील करते रहे हैं.

उनका कहना था कि पिछले 50 सालों में 'इन धर्मनिरपेक्ष पर्टियों' ने मुसलमानों को वादों के अलावा कुछ नहीं दिया.

मौलाना बुख़ारी ने आरोप लगाया कि ये पार्टियाँ मुसलमानों के समर्थन से सत्ता में आईं और उन्हें लगातार बीजेपी का डर दिखाया लेकिन मुसलमान इनकों ताकत देकर ख़ुद बेसहारा हो गए हैं.

उन्होंने कहा कि आज जब बीजेपी मुसलमानों को सहारा देने, इंसाफ़, रोज़गार और शिक्षा देने की बात कर रही है और हिंदुओं-मुसलमानों की दोस्ती की बात कर रही है तो बीजेपी को समझना चाहिए.

उनका कहना था कि धर्मनिरपेक्ष पार्टियाँ दोस्त के चोले में दुश्मन हैं और कल की दुश्मन बीजेपी आज खुलकर मुसलमानों के साथ आने के लिए तैयार है.

इमाम बुख़ारी का कहना था कि यदि बीजेपी ने दो कदम आगे बढ़ाए हैं तो उन्होंने देश और क़ौम के हित में बीजेपी के बयानों का स्वागत किया है.

गुजरात दंगे

गुजरात दंगों का ज़िक्र करते हुए वे बोले बीजेपी ने कहा है कि ये देश के माथे पर एक कलंक है.

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के शासनकाल में मुसलमानों के साथ जो हुआ उसे मुसलमान भूल नहीं सकते.

लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर ये भी कहा कि काँग्रेस के लगभग 50 साल के शासन में मुसलमानों के ख़िलाफ़ जो दंगे हुए उसको भी भुलाया नहीं जा सकता.

उन्होंने सवाल किया कि यदि मुसलमानों का कल का दुश्मन मुसलमानों के साथ दोस्ती की बात कर रहा है तो क्या उसको नकार दिया जाए ताकि वे अपने पुराने रास्ते पर वापस चले जाएँ?

उन्होंने दावा किया कि वे मुसलिम क़ौम को बचाकर ले जाना चाहते हैं.

कहाँ तक चलेंगे?

मौलाना बुख़ारी का कहना था कि मुसलमानों के पास तीन रास्ते हैं - जेहाद, हिजरत या सुलह और भारत की परिस्थितियों में जेहाद और हिजरत संभव नहीं.

उनका कहना था कि जब बीजेपी सुलह का हाथ बढ़ा रही है तो मुसलमानों को बीजेपी के इस बदले लहजे को समझना चाहिए.

उनका कहना था कि उनका काँग्रेस और अन्य धर्मनिरपेक्ष पार्टियों पर से विश्वास ख़त्म हो गया है.

लेकिन उन्होंने साथ-साथ ये भी कह दिया कि चुनाव के बाद ही पता चलेगा कि बीजेपी मुसलमानों के साथ कहाँ तक चल सकती है.

उनका कहना था कि वे उस रास्ते को ख़त्म करना चाहते हैं जिसपर देश चल रहा है.

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