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गुरुवार, 22 अप्रैल, 2004 को 02:13 GMT तक के समाचार
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त्रिपुरा में 60 प्रतिशत मतदान
मतदाताओं की कतार
राज्य सरकार के अनुरोध पर त्रिपुरा में 22 तारीख़ को मतदान का फ़ैसला किया गया था
भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में अलगाववादी संगठनों के बहिष्कार के बावजूद लोकसभा की दो सीटों के लिए क़रीब 60 प्रतिशत मतदान हुआ.

हालाँकि राज्य के अलगाववादी संगठन ऑल त्रिपुरा टाइगर फ़ोर्स (एटीटीएफ़) ने मतदान के बहिष्कार की घोषणा की थी.

लेकिन राज्य की जनता ने इस घोषणा की परवाह न करते हुए मतदान में हिस्सा लिया. मतदान में शहरी लोगों से ज़्यादा ग्रामीण लोगों में इसका उत्साह देखा जा सकता था.

दो लोकसभा सीटों वाला यह राज्य मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है.

यहाँ मुख्य विपक्षी पार्टी काँग्रेस है लेकिन भारतीय जनता पार्टी भी केंद्र सरकार की उपलब्धियों को लेकर मतदाताओं के पास पहुँची है.

त्रिपुरा में राज्य की दोनों ही लोकसभा सीटों, ईस्ट त्रिपुरा और वेस्ट त्रिपुरा, पर 6-6 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं.

त्रिपुरा के साथ-साथ कई राज्यों में हिंसा और धाँधली की शिकायत के बाद दोबारा वोट डाले जा रहे हैं.

इनमें असम, मणिपुर, उड़ीसा, गुजरात और कर्नाटक भी शामिल हैं.

सुरक्षा व्यवस्था

राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. ख़ासकर बांग्लादेश से लगी सीमा को सील कर दिया गया था.

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लगभग 20 हज़ार सुरक्षाकर्मी क़ानून व्यवस्था पक्की करने में जुटे हैं

सीआरपीएफ़, असम राइफ़ल्स, त्रिपुरा स्टेट राइफ़ल्स और राज्य पुलिस के लगभग 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था.

अगरतला में एक चुनाव अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया ,"लोगों ने अलगाववादी संगठनों के बहिष्कार की अपील के बावजूद बड़ी संख्या में मतदान में हिस्सा लिया."

हालाँकि राज्य में हिंसा की छिटपुट ख़बरें भी आई हैं. पश्चिमी त्रिपुरा ज़िले के नलबगला गाँव में असम राइफ़ल्स और एटीटीएफ़ के विद्रोहियों के बीच गोलीबारी हुई.

लेकिन किसी के मारे जाने की ख़बर नहीं है.

समीकरण

त्रिपुरा में लोकसभा की दो सीटें पर पिछले चुनावों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी जीते थे.

यहाँ तकरीबन 20 लाख मतदाता हैं जिनमें 50 प्रतिशत के करीब महिलाएँ हैं.

त्रिपुरा में 1952 से लेकर अब तक ज़्यादातर कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी जीतकर लोकसभा पहुँचे हैं.

इस चुनाव में भी पार्टी के उम्मीदवारों की स्थिति मज़बूत बताई जाती है.

चुनाव विश्लेषकों के मुताबिक यहाँ मुख्य मुकाबला मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भाजपा-तृणमूल के साझा उम्मीदवारों के बीच होगा जबकि कांग्रेस के तीसरे स्थान पर रहने का अनुमान लगाया जा रहा है.

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