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बुधवार, 21 अप्रैल, 2004 को 11:47 GMT तक के समाचार
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त्रिपुरा में मतदान की तैयारियाँ
सुरक्षाकर्मी
हिंसा की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था चौकस की गई है
पूर्वोत्तर भारत के राज्य त्रिपुरा में लोकसभा चुनावों के लिए गुरूवार को होने वाले मतदान के मद्देनज़र भारी सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.

सीमा सुरक्षा बल ने 865 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा को सील कर दिया है और पिछले दिनों के चरमपंथी हमलों को देखते हुए बड़े पैमाने पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए हैं.

इसके अलावा भारतीय वायुसेना के चार विमान कल से ही चरमपंथियों के प्रभाव वाले तथा संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त लगा रहे हैं.

राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त केवी सत्यनारायणन ने पत्रकारों को बताया कि ''राज्य भर में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं और इसके लिए पर्याप्त संख्या में असम राइफ़ल्स, सीमा सुरक्षा बल, त्रिपुरा स्टेट राइफ्ल्स और राज्य पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं.''

 त्रिपुरा की यह परंपरा रही है कि यहाँ इस तरह की धमकियों की परवाह किए बगैर बड़ी तादाद में मतदान होता रहा है
त्रिपुरा के चुनाव आयुक्त

ग़ौरतलब है कि राज्य में चरमपंथी संगठन ऑल त्रिपुरा टाइगर फ़ोर्स ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा की है.

पिछले दिनों इस संगठन ने सीमा सुरक्षा बल के चार जवानों की गोली मारकर हत्या कर दी थी जबकि अन्य दो लोग घायल हो गए थे.

राज्य के कुल 2,372 मतदान केंद्रों में से 150 पश्चिमी त्रिपुरा जिले के ऑल त्रिपुरा टाइगर फ़ोर्स प्रभावित क्षेत्र में ही हैं.

चुनाव बहिष्कार की घोषणा के चलते ही सुरक्षा के ख़ास इंतज़ाम किए गए हैं और अतिरिक्त सुरक्षा बल की मदद से संवेदनशील क्षेत्रों पर ख़ास नज़र रखी जा रही है.

इस बाबत पूछे जाने पर चुनाव आयुक्त सत्यनारायणन ने कहा कि "त्रिपुरा की यह परंपरा रही है कि यहाँ इस तरह की धमकियों की परवाह किए बगैर बड़ी तादाद में मतदान होता रहा है."

उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र सुरक्षा के पुख़्ता और अभूतपूर्व इंतज़ाम किए गए हैं और राज्य में किसी को भी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करने दिया जाएगा.

चुनाव आयोग ने यहाँ 22 तारीख को होने जा रहे मतदान की देखरेख के लिए आठ केंद्रीय पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया है.

समीकरण

त्रिपुरा में लोकसभा की दो सीटें हैं जिन पर पिछले चुनावों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों का कब्जा था.

त्रिपुरा में तकरीबन 20 लाख मतदाता हैं जिनमें 50 प्रतिशत के करीब महिलाएँ हैं. इस चुनाव में दोनों ही लोकसभा सीटों से 6-6 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं.

त्रिपुरा में 1952 से लेकर अब तक तकरीबन 8-9 बार कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी जीतकर लोकसभा पहुँचे हैं. इस चुनाव में भी पार्टी के उम्मीदवारों की स्थिति मजबूत बताई जाती है.

चुनाव विश्लेषकों के मुताबिक यहाँ मुख्य मुकाबला मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भाजपा-तृणमूल के साझा उम्मीदवारों के बीच होगा जबकि कांग्रेस के तीसरे स्थान पर रहने का अनुमान लगाया जा रहा है.

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