|
चुनावी विज्ञापनों पर अदालत का फ़ैसला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव से संबंधित विज्ञापन जारी करने से पहले चुनाव आयोग की इजाज़त लेनी होगी. समाचार एजेंसियों के अनुसार चुनाव आयोग ने आदेश दिया है कि कोई भी राजनीतिक विज्ञापन चुनाव आयोग की अनुमति के बिना जारी नहीं किए जाएँगे. ये आदेश आम चुनावों के दौरान आपत्तिजनक और आरोप-प्रत्यारोप लगाने वाले राजनीतिक विज्ञापनों पर लगाम लगाने के मकसद से दिया गया है. इस बारे में सर्वोच्च न्यायालय ने व्यापक दिशा निर्देश जारी किए हैं जो 16 अप्रैल से 10 मई तक लागू रहेंगे. इन दिशा निर्देशों के अनुसार जो व्यक्ति या राजनीतिक दल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ज़रिए विज्ञापन प्रसारित करना चाहते हैं उन्हें ऐसे विज्ञापनों की प्रसारण तिथि से पहले चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होगी. चुनाव आयोग को दो दिन के भीतर इन विज्ञापनों के बारे में फ़ैसला करना होगा. यदि किसी विज्ञापन में चुनाव आयोग के आदेश का उल्लंघन पाया जाता है तो ऐसे टीवी चैनल और केबल ऑपरेटर के उपकरण ज़ब्त किए जा सकते हैं. विज्ञापन जारी करने वाली संस्था के लिए ये बताना आवश्यक होगा कि विज्ञापन का पैसा राजनीतिक दल दे रहा है या फिर विज्ञापन राजनीतिक दल या उम्मीदवार के फ़ायदे के लिए जारी किया जा रहा है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||