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भुट्टो ने राजनीतिक जागरूकता बढ़ाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने देश में राजनीतिक जागरूकता का दौर शुरू किया. ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो को चार अप्रेल 1979 को फाँसी दे दी गई थी. भुट्टो को पाकिस्तान में एक नए दौर का प्रतीक माना जाता है और कहा जाता है कि उन्होंने लोगों को न सिर्फ़ अपने अधिकारों का अहसास दिलाया बल्कि राजनीतिक को भी राजाओं-ज़मींदारों के घरों से बाहर निकाला. भुट्टो के दौर के बारे में कहा जाता है उन्होंने समाज के तथाकथित निचले तबकों के लोगों को भी यह अहसास दिलाया कि उनके वोट की क्या अहमियत है और वे इसे अपनी इच्छानुसार इस्तेमाल कर सकते हैं. पाकिस्तान में 1947 से अब तक ज़्यादातर समय सेना का ही शासन रहा है और 1973 में जब ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने लोकतंत्र का दौर शुरू किया. लेकिन वे ज़्यादा दिन तक नहीं टिक सके और 1977 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया. इतना ही नहीं उन पर अपने एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या का आरोप लगाया गया. एक मुक़दमें में उन्हें दोषी क़रार दिया गया हालाँकि इस मामले में फ़ैसला सुनाने वाले जजों की निष्पक्षता पर भी उंगलियाँ उठाई गई थीं. कहा जाता है कि उन्हें फ़ाँसी देने से पहले कोई चेतावनी भी जारी नहीं की गई. भुट्टो के परिवार को उस समय नज़रबंद कर दिया गया था लेकिन उनकी बेटी बेनज़ीर भुट्टो को फाँसी से पहले अपने पिता से मिलने की इजाज़त दे दी गई थी. बेनज़ीर भुट्टो बाद में प्रधानमंत्री बनीं. तानाशाही उस समय सैनिक तानाशाह जनरल ज़ियाउल हक़ थे और सेना की तरफ़ से भुट्टो को फाँसी दिए जाने की सही जानकारी नहीं दी गई थी.
प्राप्त जानकारी के अनुसार भुट्टो को स्थानीय समय के मुताबिक़ आधी रात के बाद क़रीब दो बजे रावलपिंडी की ज़िला जेल में फाँसी दी गई. लेकिन दुनिया को भुट्टो की फाँसी के बारे में तब पता चला जब सरकारी रेडियो पर स्थानीय समय के मुताबिक़ ग्यारह बजे इस बारे में सूचना दी गई. फाँसी देने के बाद उनके शव को सिंध प्रांत में उनके गृहनगर ले जाया गया और वहाँ उन्हें दफ़ना दिया गया. ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो की पत्नी नुसरत भुट्टो और बेटी बेनज़ीर भुट्टो को जनाज़े में शामिल होने की इजाज़त नहीं दी गई. भुट्टो के साथ-साथ चार अन्य लोगों को भी हत्या का दोषी पाया गया था और वे जेल में बंद रखे गए. ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो एक धनी और प्रभावशाली परिवार से संबंध रखते थे. हालाँकि उन्हें अपने ही अंदाज़ में चलने वाले एक नेता के रूप में देखा जाता था लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी काफ़ी इज़्ज़त थी. कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो की मौत के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ जाएगा. उस समय संयुक्त राष्ट्र महासचिव कुर्त वाल्दहीम ने ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो को फाँसी दिए जाने की निंदा की थी. पाकिस्तान के तत्कालीन सैनिक तानाशाह जनरल ज़ियाउल हक़ ने भुट्टो पर दया दिखाने की तमाम अंतरराष्ट्रीय अपीलों को खारिज कर दिया था. |
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