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अनोखे सफ़र पर तीन ब्रितानी भाई

ब्रिटिश भाई
तीनों भाई ग्रैंड ट्रैंक रोड से सफ़र करेंगे
पश्चिम बंगाल में हावड़ा से पंजाब में पाकिस्तान सीमा तक ग्रैंड ट्रैंक रोड से सफ़र और वो भी तिपहिया से.

चौंक गए ना. इतनी धीमी सवारी से लगभग 2600 किलोमीटर लंबी यह यात्रा आसान नहीं.

लेकिन इंग्लैंड के तीन भाइयों जेफ़, क्रिस और स्टीव ईगर गुरुवार से पूरे उत्साह के साथ इस सफ़र पर निकल पड़े हैं.

वे लोग अपनी तिपहिया में यह दूरी तीन महीने में तय कर पहली जुलाई को अमृतसर पहुँचेंगे.

दिलचस्प बात यह है कि पाँच साल पहले उन्होंने श्रीलंका में पहली बार यह सवारी देखी थी और अब इस पर इतना लंबा सफ़र कर रहे हैं.

हैरत

स्टीव बताते हैं कि श्रीलंका में उन्होंने जब पहली बार यह सवारी देखी तो हैरत में पड़ गए थे और तभी से इसे चलाने की इच्छा थी.

अध्ययन की इच्छा
 हम इस बात का गहराई से अध्ययन करेंगे कि प्राचीन और ऐतिहासिक ग्रैंड ट्रैंक सड़क के आसपास रहने वाले लोगों का रहन-सहन कैसा है
जेफ़ ईगर

वे कहते हैं कि यह सवारी धीमी तो है ही भारत में काफ़ी लोकप्रिय भी है. इस पर सफ़र करने से हमें लोगों को क़रीब से देखने का मौक़ा मिलेगा.

ईगर भाइयों ने बीते छह वर्षों के दौरान दुनिया के 60 देशों की यात्रा की है. 1997 में उन्होंने अलास्का से मैक्सिको तक की यात्रा की थी.

इस साल भारत की यात्रा का फ़ैसला करने के बाद उन्होंने किसी आरामदायक सवारी की बजाए तिपहिया को ही चुना.

जेफ़ ईगर कहते हैं कि इससे पहले कई लोगों और विदेशी चैनलों ने इस ऐतिहासिक ग्रैंड ट्रैंक सड़क से सफ़र किया है लेकिन उनका सफ़र लोगों और उनकी धार्मिक मान्यताओं पर केंद्रित होगा.

उन्होंने कहा, "हम इस बात का गहराई से अध्ययन करेंगे कि प्राचीन और ऐतिहासिक ग्रैंड ट्रैंक सड़क के आसपास रहने वाले लोगों का रहन-सहन कैसा है."

तैयारी

तीनों भाइयों को इस सफ़र की तैयारियों में छह महीने लगे. सबसे छोटे स्टीव और एक अन्य भाई ने इसके लिए इंग्लैंड में बैंकिंग सेक्टर में अपनी जमी-जमाई नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया.

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तीनों भाई पिछले छह महीने से इस यात्रा की तैयारी कर रहे थे

इस सफ़र के पूरा हो जाने के बाद वे लोग अपनी तिपहिया बेचकर इससे मिली रकम किसी चैरिटी को दान कर देंगे.

जेफ़ के अनुसार इस सफ़र का मक़सद भारत और उसके लोगों को बेहतर तरीक़े से जानना है.

बाहर भारत की छवि एक ग़रीब देश की है लेकिन परंपराओं और विरासत के मामले में ये देश बहुत धनी है. इसके अलावा यहाँ के लोगों का दिल बहुत बड़ा है.

जेफ़ कहते हैं, "हम इन गाँवों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानना चाहते हैं ताकि लौटकर अपने देश के लोगों को इस बारे में बता सकें."

वे मानते हैं कि यह सफ़र काफ़ी मुश्किल होगा लेकिन उन्होंने जान-बूझकर गर्मी का मौसम ही चुना है. इसी दौरान देश में लोकसभा चुनाव उनको भारतीय जीवन के विविध पहलुओं को समझने में सहायता ही करेगी.

जेफ़ कहते हैं कि चुनाव से इस सफ़र में और भी कई रंग जुड़ जाएँगे. वे लोग इस सफ़र के हरेक लम्हों की वीडियो रिकॉर्डिंग करेंगे और बाद में लंदन लौटकर इस पर एक किताब निकालेंगे.

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