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बुधवार, 24 मार्च, 2004 को 17:35 GMT तक के समाचार
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भाजपा और उसके सहयोगी दल
जेटली, फ़र्नाडिस और दिग्विजय सिंह
एनडीए ने पाँच साल गठबंधन सरकार चलाकर भारत में राजनीतिक इतिहास रचा है
भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हुआ फिर वही भारतीय जनता पार्टी बनी.

भाजपा ने 1980 में अपनी पारी की शुरुआत की थी और संसद में उसके दो सदस्य लोकसभा में पहुँचे थे.

1996 में पहली बार भाजपा को सरकार बनाने का मौक़ा मिला लेकिन उनकी सरकार 13 दिन ही चल सकी और बहुमत के अभाव में गिर गई.

इसके बाद 1998 में भाजपा ने गठबंधन के साथी ढूढ़े और सरकार बनाई इस बार सरकार की उम्र थी 13 महीने.

उसी भाजपा ने 1999 में सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव भी लड़ा और फिर लगातार पाँच साल तक चलाते भी रहे.

यह आज़ाद भारत के इतिहास में पहली ग़ैरकांग्रेसी सरकार थी जो पाँच साल तक चलती रही. यह पहली गठबंधन सरकार भी थी.

भाजपा का गठबंधन एक बार फिर मिलकर चुनाव लड़ रहा है.

भाजपा का प्रभाव उत्तरी भारत में है और बहुत कोशिशों के बाद भी वह पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में अपना प्रभाव फैला नहीं पाई है.

यूं तो भाजपा के साथ 20 से अधिक दल हैं लेकिन उनके प्रमुख सहयोगियों में जनतादल (यू), तेलगूदेशम पार्टी, शिवसेना, अकाली दल और एआईडीएमके हैं.

जनता दल (यूनाइटेड)

जनता दल का गठन 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के खिलाफ़ चुनाव लड़ने के लिए किया गया था.

इस पार्टी ने थोड़े समय के लिए शासन भी किया लेकिन सरकार में रहते हुए ही इसके टूटने का जो सिलसिला शुरु तो अभी भी टूटने-जुड़ने का सिलसिला जारी है.

जॉर्ज फ़र्नांडिस
जनता दल (यू) भाजपा की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है

इसी सिलसिले में जनता दल (यूनाइटेड) और समता पार्टी का विलय हुआ, हालांकि चुनाव आयोग ने इस विलय को मान्यता देने से इंकार कर दिया है.

विलय को मान्यता तो तकनीकी सवाल है लेकिन तय है कि जनता दल (यू) भाजपा की सबसे ताक़तवर सहयोगी पार्टी है.

पिछली लोकसभा में इस दल के पास 20 सीटें थीं. कर्नाटक में दल के थोड़े प्रभाव को छोड़ दें तो इसका प्रभाव भी हिंदीभाषी क्षेत्रों में है.

इसके ज़्यादातर नेता बिहार से आते हैं और वाजपेयी के पिछले मंत्रिमंडल में तीन कैबिनेट मंत्री इस दल से थे और तीनों बिहार से जीतकर वहाँ पहुँचे थे.

तेलगू देशम पार्टी

इस पार्टी का पूरा जनाधार दक्षिणी राज्य आँध्रप्रदेश में है.

भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को बाहर से समर्थन देने वाली सबसे बड़ी पार्टी तेलगू देशम पार्टी के 29 सदस्य पिछली लोकसभा में थे.

तेलगू देशम पार्टी के नेता और आँध्र प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके चंद्राबाबू नायडू को इसलिए भी ताक़तवर नेता माना जाता है.

अब वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए विधानसभा के चुनाव भी लड़ रहे हैं.

चंद्राबाबू नायडू
तेलगू देशम पार्टी ने भाजपा गठबंधन को बाहर से समर्थन दे रही थी

तेलगू देशम पार्टी की स्थापना 1985 में तेलगू फ़िल्मों के मशहूर अभिनेता एनटीरामाराव ने किया था.

चंद्राबाबू नायडू एनटी रामाराव के दामाद हैं. हालांकि पार्टी पर कब्ज़े के लिए उन्हें रामाराव की दूसरी पत्नी लक्ष्मी पार्वती से लड़ाई भी करनी पड़ी.

चंद्राबाबू नायडू को युवा राजनीतिकों में सबसे तेज़ माना जाता है.

शिवसेना

शिवसेना को अति-राष्ट्रवादी हिंदू पार्टी माना जाता है.

इस पार्टी का मुख्यआधार महाराष्ट्र में है और राजधानी मुंबई में इसे बहुत ताक़तवर माना जाता है.

इस पार्टी का नेतृत्व भारत के सबसे चर्चित और उग्रवादी दक्षिणपंथी नेता बाल ठाकरे करते हैं. उनका परिवार ही पार्टी के सारी ज़िम्मेदारी संभालता है.

1966 में शिवसेना का गठन 'धरती-पुत्र' आंदोलन के बाद किया गया था. यह आंदोलन उन लोगों के ख़िलाफ़ चलाया गया था जो महाराष्ट्र के बाहर से वहाँ आए थे.शिवसेना का कहना था कि उनके आने से महाराष्ट्र के लोगों को रोज़गार का ख़तरा हो गया है.

पहले तो इसके तहत दक्षिण भारतीयों पर हमले किए गए थे लेकिन बाद में गुजरातियों और मुस्लिमों के ख़िलाफ़ भी इसी तरह की मुहिम चलाई गई.

अब ये मुहिम उत्तर प्रदेश और बिहार के मूल निवासियों के ख़िलाफ़ भी शुरु हो गई है.

शिवसेना मुस्लिमों के ख़िलाफ़ तीखे बयान देती रही है.

शिवसेना के साथ गठबंधन का प्रयोग भाजपा ने 1995 में शुरु किया था जब महाराष्ट्र में दोनों पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाई थी.

एआईडीएमके या अन्नाद्रमुक

तमिलनाडु में एआईडीएमके या अन्नाद्रमुक पार्टी द्रविड़ियन आंदोलन से उभरी थी.

जयललिता, वाजपेयी और आडवाणी के साथ
जयललिता की पार्टी पहले भी भाजपा के साथ सरकार में रह चुकी हैं

यह आंदोलन तमिल पहचान को लेकर शुरु किया गया था.

अपनी मूल पार्टी द्रमुक यानी डीएमके से टूटकर अन्नाद्रमुक का गठन 1972 में किया गया था और बाद में यही दोनों कट्टर दुश्मनों की तरह उभरे.

इस पार्टी का गठन तमिल फ़िल्मों के अभिनेता एमजी रामचंद्रन ने किया था. और उनके निधन के बाद पार्टी का नेतृत्व जयललिता के हाथों में आ गया जो उनके साथ कई फ़िल्मों में हिरोइन की भूमिका निभा चुकी थीं.

2004 के लोकसभा चुनावों में अन्नाद्रमुक ने एक बार फिर भाजपा के साथ आने का निर्णय लिया है.

1998 में भाजपा के सहयोगी के रुप में अन्नाद्रमुक सरकार में भी शामिल हुई थी लेकिन बाद में जयललिता के समर्थन वापस लेने से सरकार गिर गई थी.

1999 में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था और लोकसभा में उसके सिर्फ़ 12 सदस्य पहुँच सके थे.

2002 में राज्य विधानसभा चुनाव में ज़ोरदार जीत के बाद पार्टी के हौसले बुलंद हैं.

अकाली दल

सिखों की पार्टी कहलाने वाली अकाली दल का आधार सिर्फ़ पंजाब में है.

इस पार्टी का गठन 1920 में किया गया था.

1980 के दशक में अकाली दल के कुछ कट्टरपंथी सदस्य अलग खालिस्तान की माँग का समर्थन कर रहे थे. हालांकि 1985 में हुए पंजाब समझौते के बाद से यह माँग छोड़ दी गई.

अकाली दल के साथ भाजपा का गठबंधन 1997 में हुआ था और 1999 के लोकसभा और 2002 के विधानसभा चुनावों में गठबंधन के ख़राब प्रदर्शन के बावजूद समझौता जारी है.

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