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कांग्रेस का आरोप पत्र, भाजपा का खंडन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकसभा के चुनाव जैसे जैसे नज़दीक आ रहे हैं राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप स्वाभाविक रुप से बढ़ता जा रहा है. एक ओर गुरुवार को कांग्रेस ने भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के ख़िलाफ़ आरोप पत्र जारी करते हुए कहा कि सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है. वहीं भाजपा अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने इस आरोप पत्र को ख़ारिज करते हुए कांग्रेस पर महिला विरोधी होने और जातीयता के आधार पर भेदभाव पैदा करने का आरोप लगाया. कांग्रेस पार्टी ने जो आरोप पत्र जारी किया है उसमें कहा गया है कि भाजपा के शासन काल में देश को घोटालों से 500 अरब रुपयों का नुक़सान हुआ है. कुल 55 पृष्ठों के इस दस्तावेज़ में कहा गया है कि भाजपा की आर्थिक नीति भेदभावपूर्ण थी और उसके शासनकाल में सांप्रदायिक हिंसा बढ़ी और देश के सामाजिक ताने बाने को क्षति पहुँची. कांग्रेस ने भाजपा के गठबंधन को अवसरवादी गठबंधन कहा है और आरोप लगाया है कि भाजपा किसी भी तरह सत्ता में बने रहना चाहती थी. इस दस्तावेज़ को जारी करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भाजपा को उस समय उदय भारत या शाइनिंग इंडिया की बात नहीं करनी चाहिए जब आंध्र प्रदेश के एक ज़िले में कर्ज के बोझ में दबे दो हज़ार किसानों ने आत्महत्या कर ली हो. खंडन उधर भाजपा ने इन आरोपों का तुरंत खंडन किया. भाजपा अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने कहा कि कांग्रेस के आरोप पत्र में तथ्य नहीं हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा के बढ़ते समर्थन के कारण कांग्रेस के नेता भ्रमित हो गए हैं. उन्होंने कांग्रेस पर महिला विरोधी होने और जातीयता के आधार पर भेदभाव पैदा करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि कांग्रेस एक ऐसी सरकार का समर्थन कर रही है जो कश्मीर में महिलाओं के साथ भेदभाव करने वाला विधेयक ला रही है. |
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