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पाकिस्तान में शियाओं के जुलूस पर हमला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में शियाओं के पवित्र मोहर्रम महीने के दसवें दिन बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा शहर में शियाओं के एक जुलूस पर हमला हुआ है. इस हमले में 42 लोग मारे गए हैं. हमले में 40 लोग घायल भी हो गए हैं जिनमें कई की हालत गंभीर है. मंगलवार को मोहर्रम के दसवें रोज़ अशूरा के दिन शियाओं का एक जुलूस जा रहा था तभी वहाँ गोलीबारी हो गई. गोलीबारी के बाद दो बड़े धमाके हुए. डॉक्टरों का कहना है कि कुछ घायलों की हालत गंभीर है. शहर में अनिश्चितकालीन कर्फ़्यू लगा दिया गया है. पंजाब प्रांत के एक शहर फ़लिया में भी सुन्नी और शियाओं के बीच कुछ झड़पों की ख़बर है. इन झड़पों में दो लोग मारे गए हैं और कम से कम 40 घायल हो गए. तनाव क्वैटा में धमाके होने के बाद चारों तरफ़ अफ़रा-तफ़री मच गई. उससे पहले चारों ओर से गोलियाँ चलने की आवाज़ें सुनाई दीं.
आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता तसनीम नूरानी ने बताया, "ऐसा लगता है कि मोहर्रम के जुलूस पर सड़क पर से ही गोलियाँ चलाई गईं." ऐसी भी ख़बरें मिलीं कि उसके बाद भीड़ ने पास की दुकानों और वाहनों पर भी हमले किए और सुरक्षा बलों के वहाँ पहुँचने पर ही स्थिति पर कुछ नियंत्रण पाया जा सका. सुरक्षा बलों ने हवा में कुछ गोलियाँ चलाईं और आँसू गैस के गोले भी छोड़े. हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने क्वेटा में अनिश्चितकालीन कर्फ़्यू लगा दिया है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस हमले के बाद शहर में तनाव फैल गया है. पाकिस्तान के एक वरिष्ठ शिया नेता अल्लामा हुसन तुराबी ने माँग की है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ मंगलवार के इस हमले को रोक पाने में नाकाम रहने के लिए सरकारी अधिकारियों और आंतरिक सुरक्षा मंत्री को बर्ख़ास्त करें.
उन्होंने कहा, "यह पहला ऐसा हमला नहीं है, हमारे लोग अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं, वे मस्जिदों में भी सुरक्षित नहीं हैं." संवाददाता के अनुसार क्वेटा और पाकिस्तान के अन्य शहरों में पहले भी सुन्नी और शिया चरमपंथियों के बीच संघर्ष होते रहे हैं. इसे ध्यान में रखते हुए ही इस साल पूरे देश में शियाओं के जुलूस वाले स्थानों पर सुरक्षा के इंतज़ाम किए गए थे. पाकिस्तान में अधिकारी कह रहे हैं कि चूँकि क्वेटा अफ़ग़ानिस्तान के काफ़ी नज़दीक है इसलिए वे ये भी देख रहे हैं कि हिंसा के पीछे तालेबान समर्थकों का हाथ तो नहीं. |
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