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लोकसभा के साथ ही चार राज्यों के चुनाव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चुनाव आयोग ने लोकसभा के साथ ही चार राज्यों के विधानसभा चुनाव करवाने की घोषणा की है. इन चारों राज्यों की सरकारों ने समय पूर्व विधानसभा भंग करके राज्य में लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव करवाने की सिफ़ारिश की थी. इसके अलावा देश के कई राज्यों की खाली सीटों पर भी साथ में उपचुनाव होंगे. चुनाव आयोग का कहना है कि सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ये फ़ैसला किया गया है कि राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए भी उसी दिन मतदान हो जाए जिस दिन लोकसभा के चुनाव हो रहे हों. जिन चार राज्यों में चुनाव होने हैं उनमें आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, कर्नाटक और सिक्किम हैं. सबसे पहले आंध्र प्रदेश ने लोकसभा भंग करके लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव करवाने का फ़ैसला किया था. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्राबाबू नायडू के इस फ़ैसले के बारे में कहा गया था कि उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में राजनीतिक लाभ की उम्मीद के साथ ऐसा फैसला किया है. लेकिन इसके बाद उड़ीसा, सिक्किम और कर्नाटक की सरकारों ने भी विधानसभा भंग करके समय पूर्व चुनाव करवाने की सिफ़ारिश कर दी. उपचुनाव चुनाव आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राज्यों में 13 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी साथ में होंगे. इनमें असम, मिज़ोरम, दिल्ली, केरल और तमिलनाडु राज्यों की एक-एक सीटों पर, छत्तीसगढ़ की दो-दो सीटों पर और उत्तर प्रदेश की चार सीटों पर उपचुनाव होने हैं. इनमें आंध्र प्रदेश के अलावा सभी जगह मतगणना 13 मई को होगी. चुनाव आयोग का कहना है कि आंध्र प्रदेश में एक दिन पहले मतगणना करवाई जा सकती है. |
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