| मोतिहारी में बाढ़ की समस्या पर चर्चा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मोतिहारी में बीबीसी हिंदी कारवाँ में शामिल होने आने वाले श्रोताओं की संख्या सिवान से भी बड़ी थी. चर्चा का विषय था संकट की घड़ी में ज़िम्मेदार कौन. बहस के लिए मंच पर थे मोतिहारी के अतिरिक्त कलेक्टर गणेश प्रसाद, किसान कार्यकर्ता बजरंगी नारायण ठाकुर, नारी जागृति मंच की अध्यक्षा किरण शर्मा और एक ग़ैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि अमर सिंह अमर. नदियों से घिरे रहने के कारण मोतिहारी में बाढ़ और कालाजार जैसी विपदाएँ आती ही रहती हैं. लेकिन राहत और बचान कार्यों के अलावा क्या ऐसे संकटों के स्थायी समाधान के लिए भी कुछ किया गया है. निशाना बहस इसी सवाल से शुरू हुई और मोहम्मद सैफ़ुल्ला ने नेताओं को निशाना बनाते हुए एक शेर कहा. सर पे बाँधा था जिसने कफन साथियों ऐसे नेता का देखो वचन साथियों जंग जिस दम छिड़ी कह के यूँ चल दिए कि अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों सरकार और प्रशासन की ओर से अतिरिक्त कलक्टर गणेश प्रसाद ने कुछ बाँध परियोजनाओं और उनमें मिले जन सहयोग की बात की. लेकिन किसान नेता बजरंगी ने सरकार और प्रशासन की ग़लतियों की तरफ ध्यान खींचना चाहा. उन्होंने कहा, "नेपाल सरकार से बात करके इसका कोई ठोस रास्ता निकालने का काम नहीं किया गया. बहुत सारे अवसरों पर इसके लिए बैठकें हुई, विचार-विमर्श हुए. हमलोगों के सामने बार-बार यह विचार आया और सभी नेताओं से हमलोग माँग करते रहे और वे लोग बस आश्वासन ही देते रहे." जनसहयोग की बात पर लोगों ने बापू को याद किया जिन्होंने भारत में सत्याग्रह की परीक्षा के लिए इसी इलाक़े को चुना था और नीलहा ज़मींदारों के ख़िलाफ़ आंदोलन के लिए मोतिहारी आकर रुके थे. छात्रा अपर्णा ने कहा कि आज वो बात नहीं बची है. अपर्णा ने कहा, "हमलोगों को अपने स्तर पर योगदान करना चाहिए लेकिन हमलोग नहीं कर पाते हैं. आम जनता का सहयोग जितना अपेक्षित है उतना नहीं हो पाता है." ज़िम्मेदार दलितों के बीच काम करने वाली स्वैच्छिक संस्था के प्रतिनिधि अमर सिंह ने ध्यान दिलाया कि प्राकृतिक कही जाने वाली विपदाओं के लिए इंसान भी ज़िम्मेदार है.
उन्होंने कहा, "यहाँ की बाढ़ मानव निर्मित है. वह प्राकृतिक कम मानव निर्मित ज़्यादा है. क्योंकि बाल्मिकी नगर बाँध से बिना कोई पूर्व सूचना दिए कभी सात लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है तो कभी छह लाख क्यूसेक छोड़ा जाता है." नेपाल से आने वाली नदियों के जलागम क्षेत्रों या ढलानों पर पेड़ लगाने और कटाव को रोकने की राय भी दी गई. कर्नल अमरनाथ ने पेड़ों की कटाई पर चिंता जताई और इसे रोकने की अपील की. घूम-फिर कर बात नेतृत्व और जनता की इच्छाशक्ति पर आई और नारी जागृति मंच की किरण शर्मा ने कहा कि उसके बिना कुछ हासिल नहीं हो सकता. कुल मिलाकर जॉर्ज ऑरवेल के इस शहर में लोगों की बात में वो बेबाकी और वो धार दिखाई दी जिसके लिए ऑरवेल मशहूर थे. |
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