| ख़ून बहाने के जुनून की हद तक श्रद्धा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिलनाडु में फ़िल्मी दुनिया और राजनीति के बीच की रेखा बहुत पतली रही है और जो थी वह भी और धुंधली होती नज़र आ रही है. तमिलनाडु में लोग अपने पसंदीदा नेताओं और फ़िल्मी हस्तियों के प्रति अपना प्रेम और श्रद्धा दिखाने के लिए अक्सर हदें पार कर जाते हैं और यहाँ तक कि अपनी जान की भी परवाह नहीं करते. ऐसा ही कुछ जुनून दिखाया है चेन्नई के एक पेंटर ने जयललिता के प्रति. शिहान हुसैनी नाम के इस पेंटर ने अपने ख़ून से जयललिता की एक, दो, तीन नहीं बल्कि पूरी 56 तस्वीरें बनाई हैं और यह मौक़ा है जयललिता का 56वाँ जन्म दिन. जयललिता ने गत मंगलवार को अपना 56वाँ दिन मनाया. हुसैनी का कहना है कि वह जयललिता को "माँ शक्ति" के रूप में देखते हैं. हुसैनी ने पिछले क़रीब तीन सप्ताह के दौरान ये तस्वीरें बनाने के लिए क़रीब डेढ़ लीटर ख़ून का इस्तेमाल किया. हुसैनी ने बीबीसी को बताया, "इस दौरान वह कई बार ऐसा लगा जैसे मैं गिर पड़ूंगा लेकिन मैं ख़ुद को संभाल सका."
हुसैनी का मानना है कि अपने ख़ून से तस्वीर बनाना कोई अनोखी बात नहीं है क्योंकि वे जयललिता को बहुत साहसी महिला मानते हैं. "उन्होंने जीवन में बहुत कुछ सहा है और अपने राजनीतिक जीवन में बहुत कष्ट उठाए हैं. लेकिन उनमें मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत और चालाकी दोनों हैं." हुसैनी कहते हैं कि वह अपने नेती का बहुत सम्मान करते हैं और इस रिश्ते में ख़ून एक अनोखा बंधन क़ायम करता है. इससे हटकर हुसैनी यह भी मानते हैं कि शायद उनके इस क़दम से लोग रक्तदान के लिए आगे आएं. "लोगों को यह तो पता चलेगा ही कि तीन सप्ताह में शरीर से डेढ़ लीटर ख़ून निकाले जाने के बाद भी कोई ज़िंदा रह सकता है." हिम्मत यह पहला मौक़ा नहीं है जब हुसैनी ने जयललिता के प्रति अपनी श्रद्धा का इज़हार इस जुनून के साथ किया है.
1994 में हुसैनी ने अपने एक हाथ से 5000 टाइलें और 1000 ईंटें तोड़ीं और फिर उसी हाथ पर से 101 कारें चलवाईं. "और तब मैंने अपने ज़ख़्मी हाथ से ही जयललिता की पेंटिंग बनानी शुरू कर दीं." जयललिता ने हुसैनी की यह श्रद्धा देखने के बाद तुरंत उन्हें अपने पास बुलाया. उन्होंने हुसैनी से ख़ुद को घायल नहीं करने की गुज़ारिश की और उनके मार्शल आर्ट स्कूल के लिए ज़मीन देने का भी वादा किया था. लेकिन हुसैनी कहते हैं कि दस साल बाद भी वह अपने स्कूल के लिए ज़मीन मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं. इसलिए उन्होंने अपने नेता का ध्यान इस तरफ़ खींचने के लिए अपने ख़ून से ही पेंटिग करने का रास्ता चुना. ताज्जुब की बात ये है कि तमिलनाडु में इस तरह की घटनाएं नई नहीं हैं. जयललिता के 55वें जन्म दिवस पर एक व्यक्ति ने अपने एक उँगली काटकर ही उन्हें भेंट करनी चाही थी. 2002 में जयललिता के एक प्रशसंक ने अपनी जीभ काट ली थी और उसे तिरूपति मंदिर में चढ़ा दिया था. |
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