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गुरुवार, 19 फ़रवरी, 2004 को 17:24 GMT तक के समाचार
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'बैक गियर' में पाकिस्तान चले
भारतीय सड़कों पर टैक्सियों की भीड़
भारत की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर हरप्रीत सिंह को टैक्सी बहुत सावधानी से चलानी पड़ती है
भारत के एक टैक्सी ड्राइवर भारत-पाकिस्तान संबंधों को बेहतर करने के लिए टैक्सी को 'बैक गियर' में चलाकर पाकिस्तान जाने की योजना बना रहे हैं.

भारत के पंजाब राज्य के ये टैक्सी ड्राइवर हैं हरप्रीत देवी जो पिछली दो साल से इस तरह से टैक्सी चला रहे हैं.

उन्होंने अपनी पाकिस्तान यात्रा के लिए धन जुटाने के लिए अपना घर भी गिरवी रख दिया है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "ऐसा करने के पीछे फ़लसफ़ा ये है कि कई बार स्थिति को बेहतर बनाने के लिए पीछे जाना अच्छा होता है."

भारत और पाकिस्तान के संबंध बेहतर करने के बारे में वे कहते हैं कि उनका विचार है कि लोगों के संबंध वैसे ही बना दिए जाएँ जैसे स्वतंत्रता से पहले थे.

लेकिन उनका टैक्सी इस तरह से चलाने का सिलसिला कैसे शुरु हुआ?

 ऐसा करने के पीछे फ़लसफ़ा ये है कि कई बार स्थिति को बेहतर बनाने के लिए पीछे जाना अच्छा होता है
हरप्रीत देवी

हरप्रीत देवी का कहना है कि दो साल पहले जब वे कुछ छात्रों को टैक्सी से कहीं छोड़ने गए तो उन्होंने पाया कि उनकी गाड़ी आगे नहीं चल रही इसलिए उन्हें गाड़ी 'बैक गियर' में चलाना शुरू कर दिया.

इसके बाद उन्होंने 'बैक गियर' में गाड़ी चलाने के नए एशियाई और विश्व रिकॉर्ड कायम करने की ठान ली.

अब उनके अनुसार उन्हें पंजाब राज्य की सरकार ने इस तरह गाड़ी चलाने की ख़ास इजाज़त दी है.

उनका कहना है कि इस तरह वे 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से गाड़ी चला सकते हैं और उम्मीद करते हैं कि इस स्पीड को वे 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक ले जा सकते हैं.

हरप्रीत कहते हैं, "मेरे पास रेडार या वीडियो स्क्रीन नहीं है इसलिए गाड़ी चलाने के लिए मुझे पीछे मुड़कर देखना पड़ता है."

उनका कहना है कि उन्होंने अपनी गाड़ी के आगे जाने वाले गियरों में कुछ बदलाव किया है और हेडलाइट भी गाड़ी के पीछे लगवाए हैं.

अब वे गाड़ी को आसानी से पीछे की ओर चलाते हैं और गाड़ी काफ़ी तेज़ चल सकती है.

लेकिन ऐसा करने से उन्हें कई स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों का भी सामना करना पड़ा है.

उनका कहना है कि उन्हें गर्दन में काफ़ी ज़्यादा दर्द होता है और कई बार उल्टी भी करनी पड़ती है.

पूरे जिस्म को टेढ़ा करके गाड़ी चलाने के कारण उन्हें पीठ का दर्द भी रहने लगा है.

लेकिन वे मानते हैं कि कुछ नया करने के लिए कुछ दुख तो उठाना ही पड़ता है इसलिए दर्द हो भी तो कोई बात नहीं.

वे जानते हैं कि ऐसे गाड़ी चलाना ख़तरनाक हो सकता है और एक बार तो वे दुर्घटनाग्रस्त होते बचे हैं.

हरप्रीत कहते हैं कि अब वे गाड़ी बहुत सावधानी से चलाते हैं और पाकिस्तान यात्रा के बाद शांति और विकास का संदेश लेकर दुनिया की अन्य जगहों पर भी जाना चाहते हैं.

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