|
नेपाल में शिवरात्रि की धूम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
"आज दुनिया बहुत भ्रष्ट हो चुकी है लेकिन सिर्फ़ यही तरीक़ा है जिससे उसे सुधारा जा सकता है." ये विचार हैं जाहर नाम के एक साधु के जो शिवरात्रि के मौक़े पर अपनी चिलम से कश लगाते हुए बड़े ही भरोसे के साथ दुनिया को सुधारने की बात कहते हैं. जाहर नेपाल की राजधानी काठमांडू मे प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में हैं और मेला लगा है महाशिवरात्रि का. नेपाल में महाशिवरात्रि का यह मेला बुधवार को अपनी चरम सीमा पर पहुँचा. जाहर के ही एक और साथी 40 वर्षीय स्वामीनंदा ब्रहमाचार्य भारत से आए हैं और जाहर की चिलम से कश खींचते हुए कहते हैं, "जय शिव शंकर की. "सारी दुनिया का मालिक वही है और यह उसी का अंदाज़ है. मैं तो बस उसकी नक़ल करने की कोशिश कर रहा हूँ." वैसे तो शिवरात्रि के मौक़े पर भांग पीने का चलन है लेकिन कुछ कुछ साधु चिलम के ज़रिए तंबाकू का नशा भी करते नज़र आ जाते हैं. नेपाल में महाशिवरात्रि मनाने के लिए बहुत से साधु भारत से ही आए.
ज़रूरी नहीं कि सारे साधू चिलम ही पिएँ, बहुत से कुछ अलग करतब करते भी नज़र आए. योग और मौन बागमती नदी के किनारे कुछ साधु लकड़ी के मंच पर तरह-तरह के योग करतब दिखा रहे थे और ख़ास बात ये थी कि वे बिल्कुल ख़ामोशी से अपनी क्रिया में व्यस्त थे. इन साधुओं को आम तौर पर नागा बाबा के नाम से जाना जाता है क्योंकि वे कपड़े नहीं पहनते हैं. उनका कहना है कि कम से कम कपड़े पहन कर रहना भी योग का ही एक हिस्सा है. केदार पुरी मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से काठमाँडू पहुँचे और दो साल से मौन हैं. उनके एक मित्र साधु बालक पुरी ने बताया, "लोगों को यह कुछ अटपटा लग सकता है लेकिन हम योग सीखने वाले हैं और योग इसी तरह से किया जाता है. पास ही क़रीब दस साधुओं का जत्था बैठा है. उनमें सबसे बूढ़े हैं पचास साल के सनीनाथ.
सनीनाथ के बालों ने एक चटाई जैसा रूप ले लिया है जो कंधे पर गिरे रहते हैं. वह बालों को काटने की कोई फ़िक्र नहीं करते. "जब भगवान शिव ने ख़ुद भी लंबे बाल रखे तो हम अपने बाल काटने की जुर्रत कैसे कर सकते हैं. हम अपने बाल तभी काटते हैं जब हमें सिद्धि प्राप्त हो जाती है." नेपाल में इस तरह के साधु विदेशी पर्यटकों के लिए ख़ास आकर्षण का केंद्र रहते हैं. इन्हें देखने की इतनी होड़ रहती है कि विदेशी पर्यटक इनके फोटी खींचने और वीडियो फिल्म बनाते नहीं थकते. इन पर्यटकों से नागा साधुओं को भारी दान-दक्षिणा भी मिलती है और बहुत से साधु इसे भाँपकर मोटी कमाई करने में भी कामयाब हो जाते हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||