| लंबे इंतज़ार के बाद सुबह हुई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लगभग पंद्रह बरस की जद्दोजहद के बाद आख़िरकार एक अफ़ग़ान दंपत्ति अपने छह बच्चों के साथ एक नए जीवन की शुरुआत के लिए अमरीका रवाना हो गया. इस परिवार की दिक़्कतें यूँ भी कम नहीं थी लेकिन 11 सितंबर की घटना ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं थीं. सादिक़ मीर ने अपने परिवार के साथ कोई डेढ़ दशक तक शरणार्थी का जीवन बिताया. उन्होंने 80 के दशक में इस्लाम छोड़कर ईसाई धर्म स्वीकार करने का फ़ैसला किया तो उन्हें ऐसी परेशानियाँ हुईं कि अफ़ग़ानिस्तान छोड़ना पड़ा. उन्होंने पाकिस्तान में पनाह ली. लेकिन उन्होंने पाया कि पाकिस्तान में भी उन्हें उसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन... इसी समय शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएचसीआर ने इस मामले को गंभीरता से लिया और इस परिवार के अमरीका में शरण लेने का इंतज़ाम किया. संयोग था कि यह परिवार 11 सितंबर 2001 की ही उड़ान लेकर अमरीका जाने वाला था. लेकिन उस हमले ने उनकी यात्रा स्थगित कर दी. परिवार ने सोचा था शायद कुछ दिनों की ही बात है और सबकुछ ठीक हो जाएगा. लेकिन मामला ढाई साल लटका रह गया. 47 साल के सादिक़ मीर को सुरक्षा जाँच के नए दौर से गुज़रना पड़ा. उन्होंने अपना साज़ोसामान कुछ सूटकेसों में समेटा और इस्लामाबाद से शिकागो के लिए रवाना हो गए. एयरपोर्ट के लिए बस में सवार होने से पहले उन्हें भरोसा ही नहीं था कि यह संभव होगा लेकिन ये हो ही गया. उन्होंने कहा कि उन्हें प्रताड़ित किया गया और धमकियाँ दी गईं. हालाँकि शिकागो की ठंड इस्लामाबाद की तुलना में बहुत अधिक होगी लेकिन मीर परिवार को इसकी चिंता नहीं है. |
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