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कल्पना को लोगों की श्रद्धांजलि
अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला कल्पना चावला की कोलंबिया अंतरिक्षयान दुर्घटना में हुई मौत की पहली बरसी पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. कोलंबिया यान एक फ़रवरी 2003 को अमरीका के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र पर उतरने से पहले अमरीकी टुकड़ों में बँट गया और इसमें सवार भारतीय मूल की कल्पना चावला सहित सातों अंतरिक्ष यात्री मारे गए. उधर अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का कहना है कि एक फ़रवरी को कोलंबिया, चैलेंजर और अपोलो अंतरिक्षयान से जुड़ी दुखद घटनाओं को याद किया जाएगा. नासा के प्रमुख प्रशासक शॉन ओ कीफ़ की योजना इसे वार्षिक आयोजन बनाने का है. अपोलो वन के साथ 27 जनवरी 1967 को हुई दुर्घटना में तीन अंतरिक्ष यात्री मारे गए थे. चैलेंजर के साथ 28 जनवरी 1986 को दुर्घटना हुई जिसमें सात अंतरिक्षयात्रियों की जान गई. नासा ने न सिर्फ़ दूसरी बार कल्पना को अंतरिक्ष में भेजने का फ़ैसला किया था, बल्कि सात सदस्यीय मिशन टीम में उन्हें महत्वपूर्ण स्थान भी दिया गया. सोलह दिवसीय मिशन में वह विशेषज्ञ के रूप में शामिल की गईं. 'करनाल की बेटी' अंतरिक्ष में कदम रखने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला हरियाणा के करनाल कस्बे में पली-बढ़ी थीं. उन्होंने करनाल के ही टैगोर स्कूल से 1976 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 1982 में उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से वैमानिक इंजीनियरिंग की डिग्री पाई.
फिर वह पढ़ाई के लिए अमरीका चली गईं, जहाँ 1984 में टेक्सस विश्विद्यालय से उन्होंने अंतरिक्ष वैमानिकी में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. इसी विषय में 1988 में उन्होंने डॉक्टरेट किया, अमरीका के ही कोलोराडो विश्विद्यालय से. कल्पना ने अमरीकी अंतरिक्ष संस्था नासा से 1988 में जुड़ीं. तब उन्होंने फ़्लुइड डायनमिक्स के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अनुसंधान किया. इसके पाँच साल बाद वह कैलीफ़ोर्निया की कंपनी ओवरसेट मेथड्स में उपप्रमुख नियुक्त की गईं. वहाँ भी उन्होंने एयरोडायनमिक्स के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण अनुसंधान किए. उनके अनुसंधान पेपर अनेक नामी जर्नल में छपे. नासा ने 1994 में उन्हें संभावित अंतरिक्ष यात्रियों के रूप में चुना. कल्पना ने मार्च 1995 में जॉन्सन अंतरिक्ष केंद्र में दाखिला लिया. उन्हें अंतरिक्ष यात्रियों के पंद्रहवें दल में शामिल किया गया. साल भर के प्रशिक्षण के बाद उन्हें अंतरिक्ष यानों की नियंत्रण व्यवस्था की जाँच के काम में लगाया गया. नवंबर 1996 में घोषणा की गई कि उनके एसटीएस-87 मिशन में विशेषज्ञ की हैसियत से भाग लेने की घोषणा की गई. और साल भर बाद 19 नवंबर 1997 को वह दिन आया जब करनाल की बेटी कल्पना चावला ने अंतरिक्ष के गहन अँधेरे में भारत का नाम रोशन किया. उन्होंने 376 घंटे 34 मिनट अंतरिक्ष में बिताए. कई महत्वपूर्ण प्रयोगों को अंजाम देते हुए कल्पना ने तब धरती के 252 चक्कर लगाए यानि 65 लाख मील की दूरी तय की. नासा के जनवरी 2003 के अभियान एसटीएस-107 के लिए कल्पना को एक बार फिर मिशन विशेषज्ञ के रूप में अंतरिक्ष प्रयोगों के लिए चुना गया था. |
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