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भोजशाला में पूजा शांतिपूर्वक संपन्न
बसंत पंचमी के मौक़े पर सैकड़ों हिंदुओं ने मध्य प्रदेश के धार शहर की विवादास्पद पुरातात्विक इमारत भोजशाला में पूजा की. कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हो गया. इस इमारत को हिंदू मंदिर मानते हैं और ये इमारत कमाल मौला मस्जिद के नाम से भी जानी जाती है. कार्यक्रम भारी पुलिस बन्दोबस्त के बीच हुआ. इस बीच हिन्दू जागरण मंच ने मंगलवार को 'महिला शक्ति संगम' आयोजित करने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री उमा भारती भी इसमें शामिल होंगी. मंच का दावा है कि सैकड़ों महिलाएँ इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी. ग्यारवी सदी के इस स्मारक के बारे में हिन्दुओं का दावा है कि ये देवी सरस्वती का मंदिर है. वहीं मुसलमानों का दावा इसके मस्जिद होने का है. पारंपरिक तौर पर तो वहाँ साल में सिर्फ़ एक ही बार बसंत पंचमी के दिन पूजा होती है और हर शुक्रवार को वहाँ नमाज़ पढ़ी जाती है. ये इमारत भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के नियंत्रण में है.
इस बारे में केंद्र सरकार ने छह महीने पहले एक आदेश जारी करके हिंदुओं को ये अधिकार दिया था कि वे हर मंगलवार को चावल के कुछ दानों के साथ वहाँ प्रवेश कर सकते हैं. पुरातत्व विभाग की केन्द्रीय राज्य मंत्री भावना चिखलिया ने धार पहुँचकर वहाँ पूजा की थी. वहीं मुसलमानों के कुछ संगठनों ने केन्द्र सरकार के इस आदेश को अदालत में चुनौती दी है. इस पर अब ताज़ा विवाद ये है कि पिछले हफ़्ते इमारत के एक बंद कमरे में दो खंभे निकले जिन पर हिन्दू देवी-देवताओं की आकृतियाँ खुदी हैं. पिछले शुक्रवार मुसलमानों ने ये खंभे निकलने पर आपत्ति दर्ज की. वैसे इस बारे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है. |
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