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सोमवार, 19 जनवरी, 2004 को 21:21 GMT तक के समाचार
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श्रीनगर के मदरसों का आधुनिकीकरण

श्रीनगर का एक मदरसा
मदरसों के पाठ्यक्रम में सुधार की शुरुआत हो चुकी है

पहले कभी मदरसों पर आरोप लगा करते थे कि वे चरमपंथी पैदा कर रहे हैं लेकिन अब भारत प्रशासित कश्मीर में मदरसों का स्वरुप बदल रहा है.

मदरसे मूल रुप से इस्लाम की शिक्षा देने वाले धार्मिक स्कूल हैं.

इन मदरसों में पाठ्यक्रमों में बड़े परिवर्तन किए जा रहे हैं और पढ़ाई को अब आधुनिक बनाने की कोशिश की जा रही है.

पहले चरण में कश्मीर घाटी के 76 मदरसों में परिवर्तन किए जा रहे हैं जिससे सात हज़ार छात्रों पर असर पड़ेगा.

कश्मीर घाटी के कई मदरसे सोलहवीं शताब्दी से चल रहे हैं और कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि ये मदरसे इस्लामिक कट्टरपन को बढ़ावा देते हैं.

इन मदरसों में पढ़ने वाले ज़्यादातर छात्र बड़े होकर मौलवी बनना चाहते हैं और उत्साह में मानते हैं कि उनकी पढ़ाई इस्लामिक पढ़ाई के साथ साथ चल सकती है.

वक्फ़ बोर्ड के उपाध्यक्ष मोहम्मद शफ़ी पंडित श्रीनगर में अपना एक मदरसा चलाते हैं और उन्होंने मदरसों में सुधार का काम शुरु किया है.

मदरसे में पढ़ने वाले बच्चे
बच्चों के भीतर अब डॉक्टर और पायलट बनने की इच्छा भी दिख रही है

उनका कहना है, ''मदरसे जिस तरह शिक्षा देते हैं उससे ठीक संदेश नहीं जाता.''

उनका कहना है कि मदरसों में पाठ्यक्रम से धार्मिक शिक्षा को हटाने की ज़रुरत नहीं है बल्कि एक संतुलन बनाने की ज़रुरत है.

वे कहते हैं, ''हम कुरान और धार्मिक शिक्षा के अलावा अंग्रेज़ी, विज्ञान, गणित और अन्य विषय भी पढ़ा रहे हैं.''

महत्वाकांक्षा

इस बदलाव का सबसे अच्छा उदाहरण है सुल्तान-उल अरिफ़ीन है जो श्रीनगर में एक नया स्कूल है.

इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे डॉक्टर, वैज्ञानिक और पायलट बनना चाहते हैं.

मुस्तफ़ा यहाँ पढ़ता है और धाराप्रवाह अंग्रेज़ी बोलता है हालांकि उसके माँ-बाप न तो पढ़ पाते हैं न लिख पाते हैं.

 इस्लाम और विज्ञान तथा इस्लाम और तकनीक में कोई विरोधाभास नहीं है

प्रोफ़ेसर कामिली

वो कहता है, ''मैं बड़ा होकर डॉक्टर बनूँगा और बहुत से लोगों की जान बचाउँगा.''

उसके साथ पढ़ने वाले बच्चे भी उतने ही महत्वाकांक्षी हैं.

इस स्कूल में पढ़ने वाले ज़्यादातर बच्चे ग़रीब या मध्यम वर्ग से आते हैं.

वक्फ़ बोर्ड को उम्मीद है कि इस सुधार कार्यक्रम को इस्लामिक मौलवियों से भी मज़ूरी मिल जाएगी.

इस्लाम के विद्वान हैं. वे कहते है, ''इस्लाम और विज्ञान तथा इस्लाम और तकनीक में कोई विरोधाभास नहीं है.''

वे कहते हैं कि इस्लाम हमारे विकास के लिए है.

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