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सोमवार, 19 जनवरी, 2004 को 15:57 GMT तक के समाचार
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सेना में लिपस्टिक, बिंदी और चूड़ी पर रोक

भारतीय सेना
भारतीय सेना में नियम 1962 के बाद बदले हैं

भारतीय सेना ने अपनी महिला कर्मचारियों के लिए लिपस्टिक, बिंदी और चूड़ी पर रोक लगा दी है.

इसी तरह पुरुष कर्मचारी सिर्फ़ शादी की अँगूठी पहन पाएँगे और तिलक या विभूति जैसी चीज़ों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे.

सेना ने अपने कर्मचारियों की वेशभूषा और सौंदर्य प्रसाधनों को लेकर नए नियम निर्धारित किए हैं.

भारतीय सेना के प्रवक्ता कर्नल अनिल शोरे के अनुसार ये नियम पहली बार 1962 मे बने थे.

उस समय स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा सेना के किसी और विभाग में महिलाएँ न के बराबर थीं जबकि आज उनकी संख्या सौ तक पहुँच चुकी है.

संशोधित नियमों के अनुसार सेना में कार्यरत महिलाएँ ड्यूटी के समय लिपिस्टिक, नेल पॉलिश या माथे पर बिंदी और चूड़ियों का उपयोग नहीं कर सकेंगीं.

उन्हें कानों में छोटे बूँदे और दाएँ हाथ में विवाह की अंगूठी पहनने के साथ ही सिंदूर लगाने की इजाज़त दी गई है लेकिन सिंदूर उनकी टोपी से बाहर नहीं नज़र आना चाहिए.

इसी तरह पुरुषों को तिलक, विभूति और मौली की अनुमति नहीं होगी, इसके अलावा वे सिर्फ़ शादी की अँगूठी ही पहन पाएँगे, ग्रह-नक्षत्रों की दशा सुधारने वाली अँगूठियाँ नहीं.

मौलिक अधिकार

कुछ लोग सवाल उठा सकते हैं कि क्या सैनिकों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं है.

 हर पेशे का अपनी एक वेशभूषा होती हैं और पेशे के अनुरुप ही आपको अपने सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल का ख़याल रखना पड़ता है

रंजना कुमारी, सेंटर फॉर सोशल रिसर्च

सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक रंजना कुमारी का मानना है कि ऐसा नहीं है.

उनका कहना है, ''हर पेशे का अपनी एक वेशभूषा होती हैं और पेशे के अनुरुप ही आपको अपने सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल का ख़याल रखना पड़ता है.''

रक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी का कहना है कि चूँकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है इसलिए सेना के अधिकारियों को भी ऐसी किसी चीज़ का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिससे उनका धर्म ज़ाहिर होता हो.

उनका कहना था, ''महिलाओं के लिए सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल पर तो इसलिए भी रोक लगाई गई है कि पुरुष सहकर्मियों का ध्यान ज़्यादा न बँटे.''

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