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आरएसएस और जमीयत नेता मिले
अयोध्या विवाद सुलझाने की कोशिशों के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जमीयते-उलेमा-हिंद के नेताओं के बीच दिल्ली में बातचीत हुई है. दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार जमीयत के दफ़्तर गए जहाँ उन्होंने जमीयत नेताओं अब्दुल हमीद नोमानी और नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी से मुलाक़ात की. मुलाक़ात के बाद दोनों पक्षों की तरफ़ से संयुक्त घोषणापत्र जारी किया गया जिसमें कहा गया कि दोनों संगठनों के बीच बातचीत आगे भी जारी रहेगी और मुलाक़ात में बातचीत का आधार तय करने की कोशिश की गई.
इससे पहले 20 दिसंबर को भी जमीयत और संघ नेताओं के बीच मुलाक़ात हुई थी. तब आरएसएस प्रमुख के एस सुदर्शन और विश्व हिंदू परिषद नेता विष्णु हरि डालमिया ने जमीयत अध्यक्ष महमूद मदनी से मुलाक़ात की थी. मुलाक़ात
बुधवार को आरएसएस की तरफ़ से पहली बार उनका कोई नेता जमीयत के दफ़्तर गया. जमीयत नेताओं से लगभग दो घंटे तक मिलने के बाद संघ नेताओं ने एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया. आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा,"हमने बातचीत में पाया कि हमारा वतन, पुरखे, तहज़ीब..ये सब साँझी हैं.देशभक्ति या राष्ट्रीयता का आधार मज़हब नहीं वतन होता है. ". घोषणापत्र में कहा गया कि दोनों पक्षों के बीच आगे भी बातचीत चलती रहेगी. जमीयत नेता अब्दुल हमीद नोमानी ने कहा,"आरएसएस के मन में हमारे मज़हब और देशप्रेम को लेकर कई भ्रांतियाँ थीं.मगर हमने उनसे कहा कि जमीयत एक राष्ट्रवादी संस्था है और हम देशभक्त भी हैं.". जमीयत और आरएसएस नेताओं की इस मुलाक़ात को प्रेक्षक आगामी लोकसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं. हैदराबाद में पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में एल के आडवाणी ने कहा था कि अयोध्या विवाद का निपटारा भी उसी तरीक़े से होना चाहिए जिसतरह से भारत और पाकिस्तान का विवाद निपटाने की कोशिश की जा रही है. प्रेक्षक मानते हैं कि भाजपा आनेवाले दिनों में अपने "सब कुछ अच्छा है" की नीति के तहत चुनाव में अयोध्या मुद्दे को भी इस तरह से पेश करेगी कि इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा रही है. |
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