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पाकिस्तान में पूर्व नौसेनाध्यक्ष को सज़ा
पाकिस्तान में एक भ्रष्टाचार विरोधी अदालत ने देश के एक पूर्व नौसेनाध्यक्ष को सात साल के कारावास की सज़ा सुनाई है. अब तक इतने ऊँचे स्तर के किसी सैनिक अधिकारी को सज़ा नहीं सुनाई गई थी. उन पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है. पाकिस्तानी नौसेना के पूर्व अध्यक्ष एडमिरल मंसूरूल हक़ के अलावा पाकिस्तान के नेशनल शिपिंग कॉर्पोरेशन के पूर्व प्रमुख जावेद अली और एक अन्य अधिकारी मिर्ज़ा अशफ़ाक़ बेग को भी सज़ा सुनाई गई है. इन लोगों पर तीन जहाज़ों की ख़रीद के मामले में अवैध तरीक़े से धन लेने का आरोप लगाया गया था. सज़ा एडमिरल मंसूरूल हक़ और मिर्ज़ा अशफ़ाक़ बेग पर एहतसाब अदालत में मुक़दमा चलाया गया था. दोनों को सरकारी ख़ज़ाने को एक अरब 85 करोड़ रूपए का चूना लगाने का दोषी पाया गया. इन दोनों को सात साल के सश्रम कारावास की सज़ा के अतिरिक्त 20-20 लाख रूपए का जुर्माना देने का भी आदेश दिया गया है. तीसरे अभियुक्त जावेद अली को अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण भगोड़ा घोषित कर दिया गया और उन्हें तीन साल की सज़ा सुनाई गई. पकड़े जाने पर उन पर भी मुक़दमा चलाया जाएगा. भ्रष्टाचार के आरोप एडमिरल मंसूरूल हक़ 1994 से 1997 तक पाकिस्तान के नौसेना अध्यक्ष थे. उन पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे थे जिसके बाद वे सेवानिवृत्त हो गए और अमरीका चले गए. उन्हें पिछले साल पाकिस्तान वापस लाया गया जिसके बाद उन्होंने सरकारी धन लौटाने के प्रावधान के तहत एहतसाब ब्यूरो को लगभग 45 करोड़ रूपए दिए थे. लेकिन तीन जहाज़ों की ख़रीद के मामले में उन्हें दोबारा पकड़ लिया गया. जिन तीन लोगों को सज़ा सुनाई गई है वे भ्रष्टाचार विरोधी अदालत के फ़ैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं. |
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