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'अहिंदी भाषी क्षेत्रों में और पत्रकार भेजेंगे'
बीबीसी हिंदी सेवा के संवाददाता अहिंदी हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी काम कर रहे हैं और आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में और संवाददाताओं को भेजा जाएगा ताकि श्रोता हिंदी में इन क्षेत्रों से बीबीसी पत्रकारों के और संवाद सुन सकें. बीबीसी हिंदी सेवा की अध्यक्ष अचला शर्मा ने ये विचार हिंदी सेवा के साप्ताहिक कार्यक्रम 'आपकी बात बीबीसी के साथ' में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए व्यक्त किए. एक श्रोता के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बीबीसी हिंदी सेवा इस कोशिश में जुटी हुई है कि वह है दक्षिण भारत के राज्यों में अपने और संवाददाता भेजे. बीबीसी हिंदी सेवा की अध्यक्ष ने बताया कि पहले बीबीसी विश्व सेवा और हिंदी सेवा के प्रसारण भी बीबीसी के पत्रकारों के अंग्रज़ी संवादों के अनुवाद पर आधारित होते थे लेकिन 1994 से ऐसा नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि बीबीसी हिंदी सेवा ने भारत के बहुत सारे राज्यों में और भारत के बाहर भी हिंदी भाषी पत्रकारों की खोज की जिनके हिंदी में संवाद बीबीसी हिंदी सेवा पर प्रसारित होते हैं. अचला शर्मा ने कहा कि कुछ श्रोताओं को शायद ये लगता हो कि हिंदी भाषी राज्यों पर बीबीसी हिंदी सेवा का ध्यान ज़्यादा रहता है जहाँ हिंदी सेवा के श्रोताओं की संख्या ज़्यादा हैं लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "ख़बर तो ख़बर होती है और यदि भारत के किसी भी कोने में बड़ी घटना हो तो हिंदी सेवा उसकी अपने प्रसारणों में उपेक्षा नहीं करती." 'रेडियो की वापसी' बीबीसी हिंदी सेवा अध्यक्ष अचला शर्मा ने एक श्रोता के सवाल के जवाब में माना कि भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों में बीबीसी के कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक सुने जाते हैं क्योंकि पिछले कुछ सालों में शहरों में टेलीविज़न का बोलबाला ज़्यादा रहा है और शहरी ज़िंदगी की रफ़्तार भी बहुत बढ़ गई है. लेकिन उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में भी एफ़एम के ज़रिए रेडियो की वापसी हो रही है और बीबीसी हिंदी सेवा लगातार कोशिश कर रही है कि भविष्य में उसके प्रसारण भी शहरों में एफ़एम पर सुने जाएँ. उन्होंने माना कि 'शॉर्ट वेव' पर बीबीसी हिंदी सेवा के प्रसारणों को सुनने में दिक्कतें आती हैं और इन समस्याओं का समाधान करने के बारे में बीबीसी के वरिष्ठ अधिकारी भी जागरूक हैं.
अचला शर्मा ने कहा कि बीबीसी हिंदी सेवा समाज के सभी वर्गों के लिए कुछ न कुछ प्रसारित करने की कोशिश में जुटी हुई है. इस संदर्भ में सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए - 'करियर क्या करू?' प्रोग्राम प्रसारित किया जाता है और समय-समय पर समाज के हर वर्ग के लिए विशेष रिपोर्टें प्रस्तुत की जाती हैं. एक श्रोता ने बीबीसी हिंदी सेवा के सुबह के कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने की शैली में लाए बदलाव के बारे में पूछा. अचला शर्मा का कहना था कि ये बदलाव दुनिया भर में रेडियो की दुनिया में आ रहे बदलावों और वक्त के साथ-साथ चलने की ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं. उनका कहना था कि पिछले दस-बीस साल में ज़माना बहुत बदल गया है और विशेष तौर पर ग्रामीण श्रोता जिनके पास टेलीविज़न या केबल की सुविधा नहीं है, माँग करते आए हैं कि उन्हें ख़बरों और उनकी समीक्षाओं के साथ-साथ संगीत और अन्य विषयों की जानकारी भी दी जाए, इसीलिए ये बदलाव लाए गए हैं. बीबीसी हिंदी सेवा से साल के अंत में प्रसारित होने वाले नाटक का ज़िक्र करते हुए अचला शर्मा ने संकेत दिया कि इस बार 25 और 26 दिसंबर की सभाओं में प्रसारित होने वाला नाटक, जो पिछले कई वर्षों के तरह इस बार भी उन्होंने ही लिखा है, घर पर रहने वाली महिलाओं पर होगा. उन्होंने कहा कि विशेष तौर पर घर पर रहने वाली महिलाओं को तो ये रेडियो नाटक ज़रूर सुनना चाहिए. एक श्रोता के पूछने पर बीबीसी हिंदी सेवा अध्यक्ष अचला शर्मा ने बताया कि उनके कुछ नाटकों के संकलन 'जड़ें' और 'पासपोर्ट' के नाम से प्रकाशित हुए और इनमें से कई बीबीसी हिंदी सेवा पर प्रसारित भी हो चुके हैं. |
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