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डीएमके ने वाजपेयी सरकार से नाता तोड़ा
तमिलनाडु की एक प्रमुख पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम ( डीएमके) ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्ववाली केंद्र सरकार से नाता तोड़ लिया है. डीएमके की एक उच्चस्तरीय बैठक में फ़ैसला किया गया कि पार्टी के दोनों मंत्री पर्यावरण मंत्री टी आर बालू और स्वास्थ्य राज्यमंत्री ए राजा केंद्र सरकार से अलग हो जाएँगे. इसके अलावा पार्टी ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से भी अलग होने का फ़ैसला किया. हालाँकि पार्टी ने केंद्र सरकार को मुद्दों के आधार पर बाहर से समर्थन जारी रखने का निर्णय किया है. इस बैठक की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष एम करुणानिधि ने की. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पार्टी ने केंद्र सरकार के समर्थन के बारे में कहा कि जब तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अपने एजेंडे पर क़ायम रहता है तब तक उसे समर्थन जारी रखा जाएगा. बिगड़ते रिश्ते प्रेक्षकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से भारतीय जनता पार्टी और डीएमके के रिश्तों में तनाव चल रहा था. ग़ौरतलब है कि जून, 2001 में करुणानिधि को राज्य सरकार ने गिरफ़्तार कर लिया था. हालांकि केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप तो किया लेकिन माना जाता है कि करुणानिधि इससे संतुष्ट नहीं थे. जानकारों का कहना है कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की भारतीय जनता पार्टी के साथ बढ़ती नज़दीकियों को लेकर भी डीएमके के नेता नाराज़ थे. उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर भी अपना विरोध व्यक्त किया था. राज्य के कुछ नेताओं के ख़िलाफ़ 'पोटा' लगाए जाने को लेकर भी डीएमके नेता केंद्र सरकार की कार्रवाई से ख़ुश नहीं बताए जाते हैं. |
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