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पढ़ाई पहले, बुनाई बाद में
सर्दियों का मौसम, छात्र सवाल हल करने में लगे हैं और मैडम जी बुनाई में, यह नज़ारा कई स्कूलों में आम है. अब उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग ने क्लास में बुनाई करने पर पाबंदी लगा दी है, शिक्षा विभाग का कहना है कि इससे शिक्षिकाएँ छात्रों पर ध्यान नहीं दे पातीं. भारत में सर्दियों के दिनों में महिला टीचरों में बुनाई काफ़ी लोकप्रिय है और शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस तरह का प्रतिबंध लगाना ग़लत है. उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव नीरा यादव का कहना है कि ज़्यादातर शिक्षिकाओं का ध्यान पढ़ाई पर कम और बुनाई पर ज़्यादा होता है. बीबीसी से एक बातचीत में नीरा यादव ने जानकारी दी कि सभी सरकारी प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में क्लास में बुनाई पर रोक लगा दी गई है और इसका उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि इसका मक़सद टीचरों को यह एहसास दिलाना है कि वे पढ़ाई के समय छात्रों पर ध्यान दें, अपने निजी काम न करें.
लेकिन शिक्षक यूनियन इस प्रतिबंध को लेकर काफ़ी नाराज़ है, उत्तर प्रदेश सेकेंडरी टीचर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता आरपी मिश्रा ने इस फ़ैसले को तानाशाही क़दम करार दिया है. वे पूछते हैं, "अगर टीचर ख़ाली समय में स्टाफ़ रूम में बुनाई करते हैं तो इसमें क्या एतराज़ होना चाहिए, सरकार को पहले भ्रष्ट अफ़सरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए." बुनाई पर प्रतिबंध कोई नई बात नहीं है, अमरीका में ग्यारह सितंबर के बाद विमानों में बुनाई को रोक दिया गया क्योंकि बुनाई की सलाई को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. अभी तक किसी टीचर के ख़िलाफ़ बुनाई करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई है लेकिन यह राज्य के स्कूलों में सर्दी के दिनों में एक गर्मागर्म मुद्दा तो बना ही हुआ है. |
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