BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 01 दिसंबर, 2003 को 22:42 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
वीरेन मुंशी नहीं रहे

वीरेन मुंशी

बीबीसी हिंदी सेवा में काम कर चुके वीरेन मुंशी का शुक्रवार को भोपाल में निधन हो गया. वे सन 1984 से 1987 तक बीबीसी हिंदी सेवा से जुड़े रहे.

वीरेन भाई से मेरी पहली मुलाक़ात बुश हाउस की लिफ़्ट में हुई थी. कहते हैं पहली छाप चिरस्थायी होती है.

लम्बा छरहरा डील डौल और चेहरे पर एक गर्म मुस्कान. जिस अपनेपन से वो मिले लगा कि मैं पहले से उन्हें जानती हूँ. और फिर उसके बाद तीन साल उनके साथ काम किया- उनसे बहुत कुछ सीखा.

मेरी तरह वीरेन भाई भी आकाशवाणी से आए थे. बेहतरीन लेखक और प्रसारक थे. भाषा पर गहरी पकड़ थी. माइक्रोफ़ोन से उनका गहरा रिश्ता था.

पुराने श्रोताओं को याद होगा कि वह 'संगम' कार्यक्रम नियमित रूप से किया करते थे. सामयिक विषय साहित्यिक हों या राजनीतिक, उनका सभी पर समान अधिकार था.

मुझे याद है कि मैं साप्ताहिक रूपक किया करती थी, तो अक्सर उसका शीर्षक ढ़ूंढने के लिए वीरेन भाई की मदद माँगती. और वो तपाक से एक सटीक शीर्षक मुझे थमा देते. शायद पत्रकारिता की पृष्ठभूमि होने के लिए ये बाएँ हाथ का खेल था.

आकाशवाणी से अवकाश ग्रहण करने के बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में काफ़ी समय तक संपादक के रुप में काम किया.

वीरेन भाई बड़े खुशमिज़ाज व्यक्ति थे. जहाँ जाते सबका मन जीत लेते. कभी किसी परेशानी को गले नहीं लगाते बल्कि दूसरों को भी यही समझाते कि जीवन में उतार-चढ़ाव तो आते ही हैं.

वो ऐसे मित्र थे जिन्हें जब चाहे आवाज़ लगाई जा सकती है और वो हमेशा मदद के लिए हाज़िर होंगे. लेकिन आज मैं ये बात नहीं कर सकती.

सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>