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एक ओर अजीत जोगी दूसरी ओर विपक्ष
राज्य के गठन के बाद से यह छत्तीसगढ़ में विधानसभा के पहले चुनाव हैं. मध्यप्रदेश से अलग होने के समय ही कहा गया था कि इस राज्य में चुनाव मध्यप्रदेश के साथ ही होंगे. इस तरह से कांग्रेस को एक और राज्य में सरकार मिल गई थी. कुल 90 विधानसभा सीटों वाले छत्तीसगढ़ में इस समय कांग्रेस के 63 विधायक हैं. जब राज्य बना तो कांग्रेस के 48 विधायक थे लेकिन पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने दो हिस्सों में 13 विधायकों को तोड़कर कांग्रेस में शामिल कर लिया और फिर बाद में एक बसपा विधायक भी कांग्रेस में शामिल हो गया. एक छोटे और नए राज्य के लिहाज से छत्तीसगढ़ के चुनावों की चर्चा जितनी होनी चाहिए उससे बहुत अधिक हो रही है. और राज्य में चुनाव का रंग अन्य राज्यों से बहुत अलग है. अलग रंग इसके कई कारण हैं. इनमें से एक हैं ख़ुद मुख्यमंत्री अजीत जोगी. केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी यानी आईबी के ख़िलाफ़ कथित तौर पर झूठे दस्तावेज़ प्रधानमंत्री को सौंपने को लेकर चुनाव के ठीक पहले सीबीआई ने अदालत में मामला दर्ज किया है. इससे पहले उनके आदिवासी होने के प्रमाणपत्र को लेकर हाईकोर्ट में एक मामला चल ही रहा है. वैसे राज्य बनते ही बाल्को के विनिवेश का विरोध करके अजीत जोगी ने केंद्र से टकराव की जो शुरुआत की वह धान ख़रीदी से लेकर विधायकों को तोड़ने तक लगातार बढ़ती ही रही. एक तरह से राज्य में चुनाव का मुख्य मुद्दा ख़ुद अजीत जोगी ही बने हुए हैं. सवाल सिर्फ़ यह है कि जोगी को दोबारा सत्ता सौंपनी चाहिए या नहीं. उनकी सरकार के कामकाज को विपक्ष भ्रष्टाचार के अलावा और कुछ मानने को तैयार नहीं है. वैसे उनके बेटे अमित जोगी को लेकर भी विपक्ष बड़े सवाल खड़े कर रहा है. हालांकि कांग्रेस राज्य के विकास पर बात कर रही है लेकिन अब उसके पास एक और मुद्दा आ गया है, दिलीप सिंह जूदेव के रिश्वत वाली फ़िल्म का. प्रमुख विपक्षी दल भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के अघोषित उम्मीदवार दिलीप सिंह जूदेव के ख़िलाफ़ एक अख़बार में छपी ख़बर के बाद उनको केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा देना पड़ा है. छत्तीसगढ़िया-ग़ैर छत्तीसगढ़िया पचास प्रतिशत के लगभग पिछड़ी जाति, 32 प्रतिशत आदिवासियों और 14 अनुसूचित जाति वाले प्रदेश में राज्य बनने के बाद से छत्तीसगढ़िया-ग़ैर छत्तीसगढ़िया का मामला भी ख़ूब उछाला गया और इन चुनावों में इसका ख़ासा असर भी देखा जा रहा है. वैसे राज्य में जो मुद्दे हैं उनमें ज़्यादातर का संबंध या तो आदिवासियों से है या फिर किसानों से. सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्ष भाजपा दोनों ही आदिवासियों को वन भूमि का पट्टा दिलाने का आश्वासन दे रहे हैं और आदिवासी क्षेत्रों के विकास की बात कर रहे हैं. किसानों को लेकर भाजपा फसल चक्र बदलने को मुद्दा बनाए हुए है और जोगी डबरियों को भी. इसके अलावा भाजपा छोटे किसानों के कर्ज़ माफ़ करने का वादा कर रही है. उधर कांग्रेस कह रही है कि वह दोबारा सत्ता पर लौटी तो लड़कियों को मुफ़्त शिक्षा का अवसर देगी और पिछडा वर्ग को 27 फ़ीसदी आरक्षण दिलाने की कोशिश भी करेगी. छत्तीसगढ़ी को राजभाषा को दर्जा दिया जाना भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा है.
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