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सोमवार, 27 अक्तूबर, 2003 को 05:02 GMT तक के समाचार
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'कौरव पांडव साढ़े तीन हज़ार वर्ष पहले लड़े'

सूर्य ग्रहण
सूर्य ग्रहण के समय के आधार पर किया गया आकलन

कुरूक्षेत्र में कौरवों और पांडवों की लड़ाई अब से साढ़े तीन हज़ार वर्ष पहले लड़ी गई थी.

यह दावा बंगलौर के एक वैज्ञानिक ने ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति का गहन अध्ययन करने के बाद किया है.

प्रतिष्ठित संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस के डॉक्टर आर नारायण अयंगार का कहना है कि महाभारत में ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति का विस्तार से वर्णन मिलता है.

इसी वर्णन के आधार पर कंप्यूटर की मदद से यह आकलन किया गया है.

पेशे से सिविल इंजीनियर अयंगार संस्कृत के विद्वान हैं और महाभारत के बारे में जानकारी हासिल करने में उनकी विशेष रुचि रही है.

 कौरवों और पांडवों की लड़ाई ईसा पूर्व 1478 में हुई होगी, यह अधिक से अधिक एक वर्ष आगे-पीछे हो सकता है

डॉक्टर अयंगार

उनका कहना है, "कौरवों और पांडवों की लड़ाई ईसा पूर्व 1478 में हुई होगी, यह अधिक से अधिक एक वर्ष आगे-पीछे हो सकता है."

इस काम के लिए वैज्ञानिकों के दल ने प्लैनेटोरियम नाम का कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल किया है जिसका प्रयोग अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी करती है.

डॉक्टर अयंगार ने महाभारत के छह अलग-अलग संस्करणों में दिए गए ग्रहण के वर्णन के आधार पर ये निष्कर्ष निकाले हैं.

मतभेद

डॉक्टर अयंगार भी मानते हैं कि महाभारत की कहानी पहले लोग ज़ुबानी सुनाते रहे होंगे और बाद में इसे कलमबंद किया गया हो इसलिए समय के साथ इसमें गड़बड़ी की गुंजाइश है.

लेकिन केरल के एक ज्योतिषी के बालाकृष्ण वारियर ने डॉक्टर अयंगार के आकलन को ग़लत ठहराया है, उनका कहना है कि सिर्फ़ सूर्य ग्रहण के आधार पर सही समय का पता नहीं चल सकता.

उन्होंने डॉक्टर अयंगार को एक चिट्ठी लिखकर अपनी आपत्ति जताई है.

उनका कहना है कि कलियुग की शुरूआत को पाँच हज़ार से अधिक वर्ष हो चुके हैं और महाभारत उससे पहले की घटना है इसलिए वह सिर्फ़ साढ़े तीन हज़ार वर्ष पुरानी नहीं हो सकती.

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