|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लड़ाकों से हथियार छुड़ाने की योजना
अफ़गानिस्तान सरकार एक योजना शुरु कर रही है जिसका लक्ष्य दो साल के भीतर क़बायली लड़ाकों को हथियार छोड़ने के लिए राज़ी करना है. राष्ट्रपति हामिद करज़ई शुक्रवार को उत्तरी अफ़गानिस्तान के शहर कुंडूज़ शहर में निरस्त्रीकरण और पुनर्वास की योजना की शुरुआत कर रहे हैं. हालांकि अभी भी ये आशंका ज़ाहिर की जा रही है कि अफ़ग़ान क़बायली नेता इस योजना को स्वीकार करके अपना सहयोग देंगे या नहीं. एक अनुमान के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान में कम से कम चार लाख क़बायली लड़ाके हैं. लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र की योजना के तहत इनमें से एक लाख लोगों के पुनर्वास का लक्ष्य रखा गया है. जो लड़ाके इस योजना में शामिल होंगे उन्हें अपने हथियार सौंपने के बाद आर्थिक सहायता दी जाऐगी, कुछ कपड़े लत्ते दिए जाएंगें और खाने के लिए कुछ इंतज़ाम किया जाएगा.
आलोचकों का कहना है कि ऐसा होना मुश्किल दिखाई पड़ता है कि क़बाईली नेता इस बात के लिए राज़ी हो जाएँ कि वह अपने लड़ाकूओं को इस योजना में पूरी तरह से भाग लेने दें. और अगर वे इसके लिए तैयार भी हो जाते हैं तो भी जिस तरह के हथियार सबसे शक्तिशाली धड़ों के पास है उससे इस कार्यक्रम के विफ़ल होने की संभावना ही ज़्यादा है क्योंकि अभी तक कुछ छोटे ही हथियार ही हासिल किए जा सके हैं. वैसे यह योजना प्रतिरक्षा मंत्री मोहम्मद फ़हीम के नेतृत्व में चलाई जा रही है जिनकी कमांड में अफ़ग़ान लड़ाकूओं की एक बड़ी तादाद है और उनका प्रभाव को कम करने के लिए हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने अपनी नीतियों में कुछ सुधार भी किए गए हैं. इससे पहले इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय शांति रक्षक बलों के कंमाडर ने देश के मुख्य लड़ाकों से अपील की थी कि वह राजधानी काबुल से टैंक और भारी हथियार हटा लें. तालेबान सरकार के सत्ता से हटने के बाद बॉन में हुए समझौते में काबुल का विसैन्यीकरण एक प्रमुख मुद्दा था. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||