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जापानी महारानी शाही जीवन से परेशान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
परिवार के वारिस के रुप में बेटा पैदा करने का दबाव सिर्फ़ भारतीय परिवारों की बहुओं पर ही नहीं होता, जापान की भावी महारानी पर भी है. इतना ही नहीं वे शाही ज़िंदगी के तनाव से भी थक गई हैं. यानी इन दो तनावों में भावी महारानी मसैको बीमार हो गई हैं. उनकी बीमारी का नाम 'एडजस्टमेंट डिसऑर्डर' बताया गया है जो ऐसे अवसाद का रुप होती है जो किसी एक घटना की वजह से पैदा होता है. वैसे उन्हें 2003 के बाद से सार्वजनिक रुप से नहीं देखा गया है लेकिन अब जाकर जापान के राजकुमार प्रिंस नारुहितो ने अपनी पत्नी के बारे में कहा है कि वे शाही ज़िंदगी के तनाव की वजह से थक गई हैं. पहली बार भावी महारानी की किसी बीमारी का ज़िक्र किया गया है. शाही परिवार की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि उन्हें "भावी महारानी की ज़िम्मेदारी से, गर्भवती होने से और फिर गर्भपात होने से, और निजी तथा सार्वजनिक को अलग-अलग न देख पाने की कठिनाई की वजह से यह तनाव हुआ है" वैसे माना जा रहा है कि शाही परिवार के वारिस के रुप में बेटा देने का दबाव उनके मानसिक तनाव का बड़ा कारण है. 1999 में जब उनको गर्भपात हो गया था तो इसके लिए मीडिया के दबाव को दोषी ठहराया गया था. इसके बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया था. लेकिन जापान की परंपरा के अनुसार शाही ख़ानदान का वारिस लड़का ही हो सकता है. समाचार एजेंसी क्योदो के अनुसार अपने मानसिक तनाव की ख़बर को सार्वजनिक करने का अनुरोध ख़ुद भावी महारानी ने किया था. पिछली मई में राजकुमार नारुहितो ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि राजपरिवार राजकुमारी मसैको को जीवन जीने की पूरी आज़ादी नहीं दे रहा है. समाचार एजेंसी के अनुसार राजकुमारी मसैको का इलाज किया गया है और उन्हें कुछ दवाइयाँ भी दी गई हैं लेकिन उन्हें और आराम करने की सलाह दी गई है. (इस तरह के दबाव का सामना भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों की महिलाओं को भी करना पड़ता है. कितना ग़लत है यह दबाव? क्या आपके परिवार या परिचितों को ऐसे दबाव का सामना करना पड़ा है? क्या आप की नज़र से ऐसी कोई घटना गुज़री है? बराबर में दिए गए फ़ॉर्म के ज़रिए अपने विचार भेजें) |
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