माओ की सांस्कृतिक क्रांति के 50 साल

चीन में माओ की क्रांति से जुड़े दस्तावेज़ों और पोस्टरों की झलक देखिए.

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इमेज कैप्शन, चीन की सांस्कृतिक क्रांति के 50 साल पूरा होने पर उन 10 चीजों पर एक नज़र जो माओ के नाम से हमेशा के लिए जुड़ गई हैं. इनमें शामिल है लाल रंग की ये छोटी सी किताब.
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इमेज कैप्शन, इस छोटी सी किताब में माओ ने, क्रांति क्या है, इसे समझाने की कोशिश की है. इसमें उन्होंने लिखा है क्रांति कोई डिनर पार्टी नहीं है, ना ही लेख लिखना है, यह एक हिंसक काम है.
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इमेज कैप्शन, पीकिंग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जी शिनलिन ने 1968-69 का वह दौर देखा है जब उन्हें काम शुरू करने से पहले माओ का कथन दोहराना होता था. 1971 की तस्वीर में कुछ चीनी माओ की किताब पढ़ते नजर आ रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, माना जाता है कि 1964 से 1976 के दौरान इस किताब की पांच अरब से ज़्यादा प्रतियां छापी गईं. इसका दुनिया की 40 भाषाओं में अनुवाद हुआ.
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इमेज कैप्शन, माओ की तस्वीर वाले बैज भी चीन में काफी लोकप्रिय हुए. मोटे अनुमा के तौर पर चीनी सांस्कृतिक क्रांति के समय दो अरब बैज बनाए गए थे.
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इमेज कैप्शन, माओ के बैज 1966 से 1969 के बीच ख़ूब लोकप्रिय हुए.
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इमेज कैप्शन, माओ का करिश्मा किताब और बैज तक ही नहीं रहा. उनकी तस्वीरें घरों और दफ़्तरों की दीवारों तक जा पहुंचीं.
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इमेज कैप्शन, माओ के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बढ़ता गया.
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इमेज कैप्शन, युवाओं के लिए आर्म बैंड भी चलन में आए. इन युवाओं को रेड गार्ड्स कहा जाता था.
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इमेज कैप्शन, माओ ने एक युवा रेड गार्ड से पूछा था- 'तुम्हारा नाम क्या है?' उसने अपना जो नाम बताया, उसका मतलब जेंटल जैसा था. तब माओ ने उससे मिलिटेंट बनने को कहा था.
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इमेज कैप्शन, माओ के नेतृत्व में रेड गार्ड्स ने चीन की क्रांति में अहम भूमिका अदा की.
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इमेज कैप्शन, इस दौरान दीवारों पर ख़ूब नारे भी लिखे गए. ये नारों की शक्ल में सवाल थे.
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इमेज कैप्शन, ऐसा पहला पोस्टर मई, 1966 में नज़र आया, जिसे पीकिंग यूनिवर्सिटी के सात प्रोफेसरों ने मिलकर लिखा था.
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इमेज कैप्शन, इस दौरान लोगों का रैलियां हुई और ये उन लोगों के ख़िलाफ़ थी जिन्हें पूंजीवादी, या बुरे लोग माना जाता था.
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इमेज कैप्शन, मेमॉयर ऑफ द काउशेड नामक किताब प्रोफ़ेसर शी शियानलिन ने 1998 में लिखी थी जिसमें लेबर कैंप में उनके मृत्यु जैसे अनुभवों का ब्यौरा है.
इस पुस्तक में इस क्रांति से मिली सीखों का ब्यौरा भी दर्ज है.
इमेज कैप्शन, इस पुस्तक में इस क्रांति से मिली सीखों का ब्यौरा भी दर्ज है.
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इमेज कैप्शन, सांस्कृतिक क्रांति के समय में यूनिवर्सिटी और स्कूल सेमी सैन्य संस्थान के तौर पर चल रहे थे.
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इमेज कैप्शन, 1968 तक स्कूलों में सामान्य स्थिति नहीं थी. फैक्टरी में नौकरी नहीं मिल रही थी. रेड गार्डस के बीच आपस में संघर्ष शुरू हो गया था.
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इमेज कैप्शन, पहली जून, 1966 को पीपल्स डेली ने संपादकीय लिखा था कि पुरानी सोच, पुरानी संस्कृति, पुराने रिवाज और पुरानी आदतों को ख़त्म करना चाहिए, इसने हज़ारों साल में लोगों में ज़हर भर दिया है.
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इमेज कैप्शन, चीन में बुद्ध की इस प्रतिमा पर भी लिखा है, पुरानी दुनिया को नष्ट करो.
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इमेज कैप्शन, इस दौर में नवंबर, 1966 में रेड गार्ड ने कंफ्यूशियस के संग्रह को भी निशाना बनाकर नष्ट किया था.
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इमेज कैप्शन, 1966 से 1976 के बीच केवल आठ क्रांतिकारी ओपरा और बैलेट थे, जिसे लोग देख सकते थे.
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इमेज कैप्शन, इस तस्वीर में माओ का संदेश है जो बताता है कि कला का मुनष्यों के जीवन में क्या योगदान हो सकता है.