जब दिलीप कुमार ने मिलाया सहगल-नूरजहां को

मूक फ़िल्मों का दौर बीत जाने के बाद जिस आवाज़ को हिंदुस्तानी जनता का अपार प्रेम मिला, वह कुंदनलाल सहगल की आवाज़ थी.

उनके बाद हिंदी संगीत जगत में एक से एक बढ़कर गायक हुए, लेकिन सभी ने अपने गायन की शुरुआत सहगल की नकल करके ही की.

सहगल की 112वीं वर्षगाँठ पर उन्हें याद कर रहे हैं रेहान फ़ज़ल विवेचना में