'देखना और दर्शन अलग हैं'

जाने-माने फोटोग्राफर रघु राय ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें फ़ोटोग्राफ़र बनना है.

यूं ही एक दिन उनकी खींची तस्वीर उनके भाई ने लंदन टाइम्स को भेज दीं जो अख़बार के आधे पन्ने पर छपी. बस यहीं से शुरू हो गया रघु राय का सफर.

अब तक उनकी फोटोग्राफ़ी पर 18 से ज़्यादा किताबें आ चुकी हैं, जिनमें 'रघु रायज़ डेल्ही', 'द सिख्स', 'कलकत्ता', 'ताजमहल', 'खजुराहो', 'मदर टेरेसा' आदि हैं.

बीबीसी हिंदी की सिरीज़ 'आर्टिस्ट एट स्टूडियो' के लिए रघु राय से बात की फ़ोटो पत्रकार प्रीति मान ने.

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