नूरजहाँ: मलका-ए-तरन्नुम

वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद भी कुछ लोग ऐसे थे जो सीमा के उस पार भी उतने ही लोकप्रिय थे जितने अपने देश में. मशहूर गायिका नूरजहाँ भी उनमें से एक थीं.

ये कहना ग़लत नहीं होगा कि नूरजहाँ ने अपनी आवाज़ से भारत और पाकिस्तान की कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया है.

वर्षांत कार्यक्रमों की पहली कड़ी में रेहान फ़ज़ल याद कर रहे हैं मलका-ए-तरन्नुम नूरजहाँ को.