सोवियत संघ नहीं रहा, उसकी यादें बची हैं. देखें, उस ज़माने की कुछ तस्वीरें.
इमेज कैप्शन, इस तरह का स्थापत्य किसी को भी अचरज में डाल सकता है. हर्विग इसकी तलाश में 13 साल तक लगे रहे. यह है अबख़ाज़िया में बना बस स्टैंड.
इमेज कैप्शन, हर्विग ने 14 देशों में 30,000 किलोमीटर का सफ़र किया. इन देशों में किर्ग़िजिस्तान, यूक्रेन, मोल्दोवा और बेलारूस भी शामिल हैं. यह तस्वीर कज़ाख़स्तान के अरलस्क में बने बस स्टैंड की है.
इमेज कैप्शन, कज़ाख़स्तान का एक और बस स्टैंड. साल 2002 में लंदन से सेंट पीटर्सबर्ग मोटर साइकिल से जाते हुए क्रिस्टोफ़र को यह बस स्टैंड दिखा.
इमेज कैप्शन, क्रिस्टोफ़र हर्विग को यह बस स्टैंड अर्मीनिया के शहर सरतक के नज़दीक मिला. वे कहते हैं, "इसे पाकर मुझे जो खुशी हुई, उसकी तुलना किसी चीज से नहीं की जा सकती है."
इमेज कैप्शन, कज़ाख़स्तान के चेरिन शहर के पास बना हुई है यह बस स्टैंड. क्रिस्टोफ़र हर्विग कहते हैं कि यह बस स्टैंड सोवियत संघ नहीं, बल्कि स्थानीय और निजी कला प्रदर्शित करता है.
इमेज कैप्शन, ये बस स्टैंड काफ़ी कलात्मक हैं और स्थानीय रुचियों और कला का प्रदर्शन करते हैं. यह बस स्टैंड भी कज़ाख़स्तान में ही है.
इमेज कैप्शन, एस्टोनिया और बेलारूस में लकड़ी बहुतायत में मिलने की वजह से इस तरह के बस स्टैंड बनाए जाते हैं.
इमेज कैप्शन, आर्किटेक्ट ज़ुराब सेरेटेली का कहना है कि अबख़ाज़िया मे बने ज़्यादातर बस स्टैंड के पीछे उनका ही दिमाग था. यह बस स्टैंड इस प्रांत के गागरा शहर में बनाया गया था.
इमेज कैप्शन, क्रिस्टोफ़र हर्विग कहते हैं, इस तरह की चीजें सिर्फ़ आर्किटेक्चर नहीं हैं, वे उस समय के लोगों और उनकी स्थिति से भी अवगत कराती हैं.
इमेज कैप्शन, अबख़ाज़िया प्रांत के गडौटा शहर के पास मिला यह बस स्टैंड. इसे भी ज़ुराब सेरेटेली ने ही डिज़ायन किया था.
इमेज कैप्शन, गडौटा के बस स्टैंड के पीछे बनी इस डिजायन को भी सेरेटेली ही तैयार किया था.
इमेज कैप्शन, क्रिस्टोफ़र हर्विग कहते हैं, "दूर दराज़ इलाकों में बने ये बस स्टैंड किसी अनापेक्षित प्यारी चीज की तरह है. यह कलाकृति आस पास के लैंडस्केप का भी प्रतिनिधित्व करती है."
इमेज कैप्शन, क्रिस्टोफ़र हर्विग की इन तस्वीरों को एक पुस्तक की शक्ल दी गई है. इसका नाम है, 'सोवियत बस स्टॉप्स'.