बनेगा इंडिया? मिलें जो बन गईं खंडहर

एक नज़र ऐसे बड़े उद्योगों पर जिन पर पड़ गए ताले.

टेक्सटाइल मिल
इमेज कैप्शन, मुंबई की बंद पड़ी टेक्सटाइल यूनाइटेड मिल्स नं. 1. छह फ़्लोर की इस मिल का साल 1972 में राष्ट्रीयकरण हुआ था और कभी इसमें तक़रीबन 14 हज़ार लोग कताई और बुनाई का काम करते थे. साल 2008 में ये मिल बंद हो गई.
यूनाइटेड मिल्स
इमेज कैप्शन, मुंबई के बेहद पॉश इलाके में यूनाइटेड मिल्स 19.5 एकड़ में स्थित है.
मुंबई की ग्रेट ईस्टर्न मिल्स
इमेज कैप्शन, मुंबई की ग्रेट ईस्टर्न मिल्स की एक चिमनी और उसके आस-पास नज़र आतीं रिहायशी इमारतें. ये मिल 1839 में स्थापित हुई थी और इसमें कभी क़रीब 6,500 लोग काम करते थे. इसके ज़्यादातर हिस्सा अब बंद हो चुका है, लेकिन एक छोटे हिस्से में अब भी 50 लोग सूत निर्माण में जुटे हैं.
मुंबई में बंद पड़ी एक टेक्सटाइल मिल
इमेज कैप्शन, मुंबई में नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन की बंद पड़ी एक टेक्सटाइल मिल. कपड़ा मंत्रालय के अंतर्गत साल 1968 में नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन का गठन हुआ था. शुरुआत में इसने 16 कपड़ा मिलों के साथ शुरुआत की. 1972-73 तक ये संख्या 103 तक पहुंच गई. साल 1974 में इन सभी मिलों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया.
मुंबई की बंद पड़ी सीताराम टैक्सटाइल मिल
इमेज कैप्शन, मुंबई की बंद पड़ी सीताराम टैक्सटाइल मिल. कभी इसे भारत सरकार का स्वामित्व हासिल था. ये मिल 1984 में बंद हो गई. तब इसमें चार हज़ार लोग काम करते थे. वर्तमान में मिल के 1,500 पूर्व कर्मचारी अपने हक़ को लेकर मिल के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं.
हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचईसी) की फ़ैक्ट्री
इमेज कैप्शन, रांची में बंद पड़ी हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचईसी) की फ़ैक्ट्री. ये प्लांट भारत के सबसे बड़े ढलाई के कारख़ानों में से एक था. झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसको प्रदूषित कचरा स्वर्णरेखा नदी में बहाने के आरोप में बंद करने का आदेश दिया.
हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचईसी) की फ़ैक्ट्री
इमेज कैप्शन, एचईसी का ये प्लांट 13.16 लाख स्क्वॉयर मीटर में फ़ैला है. इसमें रेलवे, रक्षा, परमाणु ऊर्जा और स्टील प्लांट से जुड़ा काम होता था.
रांची में बंद पड़ा स्वर्णरेखा घड़ी कारखाना
इमेज कैप्शन, रांची में बंद पड़ा स्वर्णरेखा घड़ी कारखाना. यहां पर एचएमटी (हिंदुस्तान मशीन टूल्स) की घड़ियों की असेंबलिंग होती थी. ये कारखाना वित्तीय संकट की वजह से बंद हो गया. कारखाने के शिलान्यास का पत्थर ही अब इस कारखाने की बाक़ी पहचान रह गई है.
रांची में बदहाल हालत में पड़ी हाई टेंशन इंसुलेटर फ़ैक्ट्री
इमेज कैप्शन, रांची में बदहाल हालत में पड़ी हाई टेंशन इंसुलेटर फ़ैक्ट्री. फ़ैक्ट्री की बंद पड़ी ज़्यादातर मशीनें या तो ख़राब हो चुकी हैं या चोरी हो गई हैं. कभी ये बिजली सप्लाई करने वाले बेहतरीन क्वालिटी के इंसुलेटर बनाने के लिए मशहूर थी. ये फ़ैक्ट्री बिहार सरकार के अधीन हुआ करती थी.
कानपुर की म्योर मिल्स
इमेज कैप्शन, कानपुर के सिविल लाइंस स्थित म्योर मिल्स. नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन के अधीन म्योर मिल्स 1874 में शुरु हुई. 2002 में ये मिल बंद हो गई. इस मिल में 6300 मज़ूदर काम करते थे जिन्हें वीआरएस दे दिया गया. इस मिल में सूट, तौलिया और अन्य तरह का कपड़ा बनता था. इस मिल की लगभग सभी मशीनें बिक चुकी हैं. मिल की सुरक्षा के लिये 10 से 12 लोग लगे हुए हैं.
कानपुर की विक्टोरिया मिल
इमेज कैप्शन, कानपुर की विक्टोरिया मिल. ये मिल भी नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पारेशन के अधीन थी. ये साल 1875 में शुरु हुई और 2002 में बंद हो गई. मिल बंद होने के समय इसमें 1200 मज़दूर काम करते थे.
ख़स्ताहाल टैफ़्को मिल
इमेज कैप्शन, कानपुर की ख़स्ताहाल टैफ़्को मिल. ये फ़ैक्ट्री जूते बनाने के लिए मशहूर थी. ये 1886 में शुरु हुई और 2001 में बंद हो गई. बंद होने के समय इसमें दो हज़ार कर्मचारी काम कर रहे थे. कुछ पूर्व कर्मचारी अब इसकी सुरक्षा में लगे हैं.