पेशावर के आर्मी स्कूल की ये तस्वीरें विचलित कर सकती हैं.
इमेज कैप्शन, पाकिस्तान में पेशावर के आर्मी स्कूल पर तालिबान के हमले में 132 बच्चों के अलावा नौ स्टाफ़ सदस्यों की मौत हुई. चरमपंथी एक से दूसरी क्लास में गए और ढूंढ-ढूंढकर बच्चों को गोलियां मारते रहे. ये तस्वीरें आर्मी स्कूल के भीतर की हैं, जो शायद आपको विचलित कर सकती हैं, इसीलिए इन्हें ब्लैक एंड व्हाइट में रखा गया है.
इमेज कैप्शन, "काले रंग के बड़े बूट पहने एक आदमी को मैंने अपनी तरफ़ आते देखा. शायद वह बच्चों को ढूंढ रहा था. मेरा जिस्म कांप रहा था. मैं उन काले जूतों को कभी नहीं भूल सकता. मेरे चारों तरफ़ पड़े मेरे दोस्त या तो मर चुके थे या ज़ख़्मी थे." यह 16 साल के छात्र शाहरुख़ ख़ान की कहानी है, जिनके पैर में दो गोलियां लगीं. जब बंदूक़ लिए लोग क्लास में घुसे तो वह डेस्क के नीचे छिप गए थे और ख़ुद को मरा हुआ दिखाने की कोशिश की.
इमेज कैप्शन, स्कूल के एक छात्र अब्दुल्लाह जमाल के पैर में गोली लगी जब वह फ़र्स्टएड क्लास में थे. एसोसिएटेड प्रेस को वह बताते हैं, "मैंने रोते-चिल्लाते बच्चों को गिरते देखा. मैं भी गिर गया. मुझे बाद में पता चला कि मुझे भी गोली लगी थी. सभी बच्चों को गोलियां लगी थीं और सभी के ख़ून बह रहा था.
इमेज कैप्शन, 13 साल के ख़ालिद ख़ान बताते हैं कि वह और उनके दोस्त एक फ़र्स्टएड का प्रशिक्षण ले रहे थे, जब दो आदमी हथियारों के साथ आए. दोनों सफ़ेद कपड़ों में थे और उन्होंने काली जैकेट पहन रखी थीं. "अचानक उन्होंने बच्चों पर गोलियां चलाईं और बाहर निकल गए. आर्मी डॉक्टर और कुछ सैनिक वहां से किसी तरह बच निकले और इसके बाद हमने दरवाज़े को अंदर से बंद कर दिया. मगर वो जल्दी ही फिर आ गए. उन्होंने दरवाज़ा तोड़ा और अंदर घुसकर फिर फ़ायरिंग शुरू कर दी. उन्होंने मेरी क्लास के तक़रीबन सभी साथियों को मार डाला."
इमेज कैप्शन, मुदस्सिर अवान की कहानी भी अलग नहीं. वह बताते हैं कि "जैसे ही फ़ायरिंग शुरू हुई, हम क्लासरूम्स में भागे. क्लास नौ और 10 के लिए पार्टी रखी गई थी, इसलिए बहुत कम बच्चे वहां थे. ऊपर वाले माले पर 11वीं और 12वीं क्लास के इम्तिहान चल रहे थे और वहां बच्चे बैठे थे. मैंने देखा कि छह-सात हमलावर थे. वो हर क्लास में घुसते और बच्चों को मार डालते. "
इमेज कैप्शन, "हमें हालात समझने में कुछ मिनट लग गए. इसके बाद हम भागे. जब तक हम कमरे को अंदर से बंद कर पाते, तीन हमलावर अंदर घुस आए. क्लास में 10 लड़के थे. उन्होंने सभी को मार दिया. मैं अकेला बचा. " 17 साल के अमीन के मन पर गहरा असर पड़ा है.
इमेज कैप्शन, कशन को पैरों में गोलियां लगी हैं मगर वो बचने में कामयाब रहे. वह बताते हैं, "हम हॉल में बैठे थे और एक कर्नल हमें लेक्चर दे रहे थे तभी हमने पीछे से फ़ायरिंग की आवाज़ सुनी, जो लगातार क़रीब आ रही थी. अचानक हमारे पीछे वाला दरवाज़े पर धक्का दिया गया और दो लोगों ने हम पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं."
इमेज कैप्शन, एक सेनाधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर एनबीसी को बताया, "उन्होंने एक टीचर को क्लासरूम में ही बच्चों के सामने जला दिया. उन्होंने टीचर के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़का और बच्चों को उसे देखने को मजबूर किया. "
इमेज कैप्शन, 14 साल के एक स्कूली बच्चे के पिता ताहिर अली को अपने बेटे की लाश मिली. उनका कहना था, "मेरा बेटा सुबह स्कूल यूनीफ़ॉर्म में था और अब ताबूत में है. मेरा बेटा मेरा ख़्वाब था, मेरा ख़्वाब मर गया है."
इमेज कैप्शन, क़ई घंटे तक तालिबान चरमपंथी और सुरक्षाबलों के बीच फ़ायरिंग होती रही. स्कूल की कुछ दीवारों पर इतनी गोलियों के निशान हैं कि इस वारदात के पैमाने का अहसास होता है.
इमेज कैप्शन, एक बच्चे ने नाम न लिए जाने की शर्त पर पाकिस्तान के जियो न्यूज़ को बताया, "हम कुर्सियों और मेज़ों के नीचे छिप गए थे मगर वो हमारे सिरों और पैरों पर गोलियां दाग़ रहे थे. वो लगातार गोलियां चलाते हुए कमरे में अंदर आने लगे. मगर हम नहीं हिले क्योंकि वो हर उस बच्चे पर गोली चलाते थे जो हिलता था. हम वहीं पड़े रहे."
इमेज कैप्शन, आर्मी स्कूल में ऑपरेशन के एक दिन बाद पाकिस्तान सेना ने मीडिया को आर्मी स्कूल में घुसने की इजाज़त दी. इसे देखकर कई मीडियाकर्मी भी ख़ुद पर क़ाबू नहीं रख पाए.
इमेज कैप्शन, कुछ क्लासों की दीवारें आग की वजह से पूरी तरह काली पड़ चुकी हैं. यह वह जगह हैं जहां चरमपंथियों ने धमाके किए और एक टीचर को आग लगाकर जला दिया था.
इमेज कैप्शन, स्कूल के पास मौजूद एक शख़्स नईम ख़ान ने हमले के दौरान के हालात के बारे में कहा, "मैं वहीं था. तभी मुझे धमाका सुनाई पड़ा जो काफ़ी तेज़ था. मैं कुछ पास पहुंचा. मगर फ़ौजियों ने किसी को अंदर नहीं जाने दिया. उस वक़्त तो मीडिया को भी अंदर जाने की इजाज़त नहीं थी. "
इमेज कैप्शन, पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल की एक नर्स नसरीन क़य्यूम ने कहा, "लगातार लाशों को ताबूतों में रखते हुए आंसू निकल रहे हैं. यह मंज़र किसी को भी पागल कर सकता है. लेडी रीडिंग अस्पताल में हमलों में ज़ख्मी और मारे गए बच्चे लाए गए थे.
इमेज कैप्शन, पाकिस्तान की एपीपी न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, शुरू में एक आत्मघाती स्कूल के ऑडिटोरियम में घुसा था और वहां बच्चों के बीच जाकर उसने ख़ुद को उड़ा दिया. इसके बाद सैनिक वेशभूषा में दूसरे चरमपंथी स्कूल में घुस आए और अंधाधुंध फ़ायरिंग करने लगे. सेना ने स्थानीय समय के मुताबिक़ एक बजे ऑपरेशन शुरू किया जो शाम छह बजे ख़त्म हुआ.
इमेज कैप्शन, एक नौ साल का बच्चा इतना ख़ौफ़ज़दा था कि वह नाम बताने से भी डर रहा था. उसने बताया कि जब फ़ायरिंग शुरू हुई तो टीचर उनकी क्लास को पिछले दरवाज़े से बाहर ले गई. "उन्होंने हमसे चुपचाप क़ुरान पढ़ने को कहा. जब हम दरवाज़े से बाहर निकले तो वहां बहुत से बच्चों के मम्मी-पापा मौजूद थे जो रो रहे थे. मैंने अपने पापा को देखा, वह भी रो रहे थे."