इमेज कैप्शन, हाल ही में दिल्ली सरकार के कला संस्कृति एवं भाषा विभाग के सौजन्य से दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा संस्कृत नाटकों का मंचन किया गया. इसमें ‘आम्रपाली’ नृत्य नाटिका से लेकर ‘जलियांवाला बाग’ जैसे नाटक संस्कृत भाषा में मंचित हुए. संस्कृत भाषा के नाटकों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे. कई लोगों को सभागार में जगह न मिलने की वजह से वापस लौटना पड़ा. हालांकि दर्शकों को संस्कृत भाषा समझने में परेशानी न हो, इसलिए मंच के साथ ही प्रोजेक्टर द्वारा संस्कृत के संवादों का हिंदी रूपांतरण भी प्रस्तुत किया जा रहा था. तस्वीर में जलियांवाला बाग़ नाटक का एक दृश्य.
इमेज कैप्शन, संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. धर्मेंद्र कुमार के अनुसार दिल्ली के प्रबुद्ध एवं आम लोगों की मांग को देखते हुए अकादमी ने इस वर्ष उच्च कोटि के संस्कृत नाटकों के मंचन की योजना बनायी. ‘आम्रपाली’ व ‘जलियांवाला बाग’ जैसे नाटकों के माध्यम से आम दर्शकों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया गया. इन नाटकों के में बड़ी संख्या में उपस्थिति को देखते हुए भविष्य में और बड़े पैमाने पर संस्कृत नाटकों और हिंदी नाटकों को प्रस्तुत करने की योजना बनायी जा रही है.
इमेज कैप्शन, नाटक देखने आए अजय गुप्ता कहते हैं कि जलियाँवाला बाग को मैं पहले हिंदी में देख चुका हूँ, लेकिन मैं देखना चाहता था कि देश की आजादी से जुडी एक बड़ी घटना पर केंद्रित नाटक देश की प्राचीन भाषा संस्कृत में कैसा होगा, और यह मेरी उम्मीद से भी अधिक अच्छा था. मुझे लगता है की हमारी युवा पीढ़ी को देश की प्राचीन भाषा और इतिहास दोनों से परिचित कराने के लिहाज से भी ऐसे नाटकों का मंचन होते रहना चाहिए.
इमेज कैप्शन, दिल्ली के गौतम नगर से नाटक देखने आई प्रेमलता एक गृहिणी हैं. उन्होंने बताया कि वो पहले भी संस्कृत नाटकों का मंचन देख चुकी हैं. आगे भी वो इस तरह अलग विषयों पर संस्कृत भाषा में नाटक देखना चाहती हैं.
इमेज कैप्शन, ‘जलियांवाला बाग़’ नाटक के निर्देशक नदीम ख़ान का कहना था कि वे पहले कई बार इस नाटक को हिंदी व पंजाबी में निर्देशित कर चुके हैं. संस्कृत में इस नाटक को करना उनके लिए अत्यंत रोचक अनुभव रहा. खासकर गुरुकुल के बच्चों के साथ इस नाटक को करने और दर्शकों से मिले प्रोत्साहन ने उनका बहुत उत्साहवर्धन किया. नदीम भविष्य में भी संस्कृत भाषा में नाटक मंचित करना चाहते हैं.
इमेज कैप्शन, संस्कृत नृत्य नाटिका आम्रपाली में मगध सम्राट अजातशत्रु का किरदार निभाता कलाकार. अजातशत्रु वैशाली पर हमला कर उसे अपने राज्य में मिलाना चाहते थे.
इमेज कैप्शन, संस्कृत भाषा में पीएचडी कर रही स्नेहा को इस बात की खुशी थी कि हिंदी के नाटक को संस्कृत में रुचिकर ढंग से रूपांतरित किया गया.
इमेज कैप्शन, माहेश्वरी वेद व्यास गुरुकुल से नाटक देखने आये छात्रों अनुराग और राजा को संस्कृत भाषा में नाटक देखना बहुत भाया, वे गुरुकुल में संस्कृत में शिक्षा ले रहे हैं और भविष्य में उनकी संस्कृत अध्यापक बनने की चाह है. ये छात्र संस्कृत में होने वाले कार्यक्रमों को लेकर उत्साहित थे,और उनका मानना है की इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन से अधिक से अधिक लोग संस्कृत भाषा से जुड़ सकेंगे.
इमेज कैप्शन, निर्देशक नीलाक्षी राय ने अपनी संस्था ‘पारंगत प्रयाग कला केंद्र’ द्वारा संस्कृत भाषा में ‘आम्रपाली’ नृत्य नाटिका के रूप में एक अनूठा प्रयोग किया. इसमें संस्कृत भाषा में कथक नृत्य शैली को आधार बनाते हुए इस नृत्य नाटिका का मंचन किया गया. नीलाक्षी के अनुसार संस्कृत भाषा को इस आधुनिक युग में युवा पीढ़ी में और लोकप्रिय बनाने के लिए वे इसी तरह प्रयोग करती रहेंगी.
इमेज कैप्शन, आईटी कंपनी में काम करने वाली स्मृति पहली बार संस्कृत भाषा में नाटक देखने आई थी. स्मृति कहती हैं, "मैंने हिंदी और अंग्रेजी में तो कई नाटक देखे थे, लेकिन संस्कृत में पहली बार कोई नाटक देख रही हूँ. किताब में संस्कृत पढ़ना और सिर्फ इतना कि इस सब्जेक्ट में पासिंग मार्क्स मिल जाएँ अलग बात है और संस्कृत में नाटक देखना अलग अनुभव. मेरा अनुभव बेहतरीन रहा और मैं अब आगे भी संस्कृत भाषा में नाटक देखना चाहूंगी.
इमेज कैप्शन, डॉ. धर्मेंद्र के अनुसार संस्था का प्रयास है कि कालिदास रचित प्रसिद्ध संस्कृत नाटकों व भगत सिंह, चंद्र्शेखर आजाद आदि पर संस्कृत में नाटकों का शीघ्र ही बड़े पैमाने पर मंचन किया जाए. नाटकों के अलावा कव्वाली, कविता पाठ व कई अन्य कार्यक्रम भी संस्कृत भाषा में प्रस्तुत करने और व्यापक स्तर पर आम दर्शकों को इनसे जोड़ने की योजना है. (सभी तस्वीरें और कैप्शन - प्रीती मान)