कुमार गंधर्व की याद में

दिल्ली में कुमार गंधर्व की 90वीं जयंती पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया.

कुमार गंधर्व का पोस्टर
इमेज कैप्शन, कुमार गंधर्व नाम से प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक शिवपुत्र सिद्धरमैया कोमकली की पुण्य स्मृति पर स्मृति संध्या का आयोजन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में दिल्ली की शुरुआती ठंड में संगीत की गुनगुनाती गर्माहट के साथ किया गया.
गायन करतीं कलापिनी कोमकली
इमेज कैप्शन, "निर्भय निर्गुण गुण रे गाऊँगा" कबीर को गाने वालों में पंडित कुमार गंधर्व का नाम अग्रणी है. उन्होंने दस बरस की छोटी सी उम्र में ही संगीत समारोहों में अपने चमत्कारी गायन से सबको हैरत में डाल दिया. इस वजह से उन्हें कुमार गंधर्व कहा जाने लगा. आपने परंपरागत रचनाओं के अलावा स्वरचित बंदिशें, तराने, संत कवियों की भक्ति वाणी, ऋतु संगीत, जोड़ राग और लोकगीतों को भी अपने गायन में समाहित किया.
गायन करतीं कलापिनी कोमकली
इमेज कैप्शन, कुमार जी की परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं उनकी बेटी कलापिनी कोमकली. उनके पौत्र भुवनेश कोमकली ने कार्यक्रम की शुरुआत कुमार गंधर्व की गाई हुई बंदिशों से की. पंडित जी का कहना था, बंदिशों को बंदिशों से बंधा नहीं होना चाहिए. उनमें विस्तार होना चाहिए. कलापिनी जी ने राग भीम पलाश, "मारू जी भूलो ना म्हाने" से संगीत संध्या का शुभारंभ किया.
भुवनेश कोमकली
इमेज कैप्शन, भुवनेश कोमकली ने राग कल्याण और पूरिया धन श्री (यह राग पूरिया और धनश्री रागों का मिश्रण है, मगर कई विद्वान इसे स्वतंत्र राग मानते हैं ), 'मृगनयनी तेरा यार रे रसिया' और 'मुख तेरो कारो समझ पड़े ना मोहे से' इस संगीतमय संध्या को आगे बढ़ाया.
डा. मुकुंद लाठ
इमेज कैप्शन, इस स्वर संध्या में कलापिनी कोमकली और रेखा ईनामदार द्वारा संपादित पुस्तक "कालजयी कुमार गंधर्व " का लोकार्पण डा. मुकुंद लाठ ने किया.
ओमप्रकाश जैन, मुकुंद लाठ, अशोक वाजपेयी और कलापिनी कोमकली
इमेज कैप्शन, 'कालजयी कुमार गंधर्व' पुस्तक मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है. इस ग्रन्थ में विविध लेखों के माध्यम से पंडित कुमार गंधर्व जी के जीवन व संगीत यात्रा को जाना जा सकता है.
मधुप मुद्गल
इमेज कैप्शन, 'गुरु जी जहाँ बैठूं वहां छाया जी' कुमार गंधर्व जी के शिष्य और पद्म श्री से सम्मानित शास्त्रीय गायक मधुप मुद्गल गायन के पूर्व तानपुरे के सुर मिलाते हुए. पंडित कुमार गंधर्व के लिए तानपुरा किसी जीवंत संगतकार की तरह उनके संगीत का अभिन्न अंग था.
मधुप मुद्गल
इमेज कैप्शन, मधुप मुद्गल ने स्वरचित रचना विलंबित ख़याल, राग छाया नट में झुमरा ताल 'बोल नेवर की झंकार' और राग सोहिनी पंचम जिसे गौरी पंचम भी कहते हैं (मध्य लय तीन ताल) 'जो थारी या छब' गाकर अपने गुरु को स्वरांजलि दी. मधुप के अनुसार कुमार कहते थे कि किसी कलाकार के तीन स्वर भी लग जाएं तो उसका जीवन चल सकता है, और यदि सातों स्वर लग जाएं तो क्या बात है.
कलापिनी कोमकली और माधवी मुद्गल
इमेज कैप्शन, कालजयी कुमार गंधर्व के रूप में कलापिनी कोमकली की अपने पिता और गुरु को पुत्री व शिष्या की श्रद्धांजलि थी. अपने बाबा की तस्वीर के साथ कलापिनी कोमकली और माधवी मुद्गल. माधवी मुद्गल प्रसिद्ध ओड़िसी कलाकार हैं.
 डॉ. बीएन गोस्वामी ने
इमेज कैप्शन, इस अवसर पर डॉ. बीएन गोस्वामी ने 'फ्रॉम साउंड टू इमेज.…एंड बैक टू साउंड' कुमार जी की बंदिशों और मध्यकालीन चित्रों पर उद्बोधन और स्लाइड शो प्रस्तुत किया. अगली कड़ी में कुमार जी का 'महफ़िल' वीडियो नई पीढ़ी के लिए पंडित कुमार गंधर्व की गायकी से रूबरू होने का मौक़ा था. उन्हें सामने सुन चुके लोगों को कुमार जी की मौजूदगी का अहसास करा रहा था. (सभी तस्वीरें और कैप्शन प्रीति मान).