ये महल कभी हसीन था...

अफ़ग़ानिस्तान के शाह ने 1920 के दशक में बनवाया था यूरोपीय शैली का महल.

दारुल अमन महल, काबुल अफ़ग़ानिस्तान
इमेज कैप्शन, अफ़ग़ानिस्तान में काबुल के बाहरी इलाक़े में स्थित दारुल अमन (शांति का घर) महल एक समय अफ़ग़ानिस्तान के सबसे समृद्ध और ख़ूबसूरत इमारतों में एक था. यह 'घायल महल' 1920 के दशक की अपने सुनहरे दौर की परछाई बन कर रह गया है. लंबे गृहयुद्ध ने इस महल की भी हालत पस्त कर दी है.
दारुल अमन महल, काबुल अफ़ग़ानिस्तान
इमेज कैप्शन, 1918 में अफ़ग़ान शाह अमानुल्लाह ने ब्रितानियों को हराकर अपने देश के लिए आज़ादी हासिल की थी. उन्होंने 1920 के दशक के शुरुआत में अपने महल को नई-यूरोपीय शैली में बनवाया था. महल का आलीशान सामने वाला हिस्सा अब भी सलामत है.
दारुल अमन महल, काबुल अफ़ग़ानिस्तान
इमेज कैप्शन, महल में एक बार आग लग गई थी. 1969 में इसका पुनर्निर्माण किया गया. 1970 और 1980 के दशक में इसमें देश के रक्षा मंत्रालय का ठिकाना रहा.
दारुल अमन महल, काबुल अफ़ग़ानिस्तान
इमेज कैप्शन, 1992 में कम्युनिस्ट सरकार के गिरने और फिर गृहयुद्ध छिड़ने के बाद महल पर मुजाहिदीन लड़ाकों का क़ब्ज़ा हो गया. महल की दीवार पर अब भी गोलियों के निशान देखे जा सकते हैं. इस दीवार पर किसी ने हाथ से लिख रखा है, "सभी काफिरों की मौत हो."
दारुल अमन महल, काबुल अफ़ग़ानिस्तान
इमेज कैप्शन, महल के आलीशान खंभे गोलाबारी और युद्ध झेलने के कारण कमज़ोर तो हुए हैं लेकिन गिरे नहीं हैं.
दारुल अमन महल, काबुल अफ़ग़ानिस्तान
इमेज कैप्शन, दारुल अमन महल की विशाल वृत्ताकार सीढ़ियाँ संगमरमर से बनी हुई हैं. शायद गृहयुद्ध के दौरान यहाँ रहने वालों ने दीवारों पर अपने नाम लिख दिए हैं.
दारुल अमन महल, काबुल अफ़ग़ानिस्तान
इमेज कैप्शन, युद्ध के ज़माने की दीवार पर लिखी इबारतें अब भी देखी जा सकती हैं. इन्हें किसने लिखा इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है लेकिन वो जो भी रहे हैं उनके बारे में ये ज़रूर कहा जा सकता कि वो लोग हेलिकॉप्टर और टैंक वाले युद्ध के चश्मदीद रहे थे.
दारुल अमन महल, काबुल अफ़ग़ानिस्तान
इमेज कैप्शन, भारी गोलाबारी में महल की छत तबाह हो गई है. छत का लोहे का ढांचा अर्ध-वृत्ताकर हॉल में लटकता देखा जा सकता है.
दारुल अमन महल, काबुल अफ़ग़ानिस्तान
इमेज कैप्शन, उजाड़ महल से काबुल शहर के बाहरी हिस्से में पनपती नई रिहाइश को देखा जा सकता है.