84 के निशां, ना ज़मीन से गए, न ज़ेहन से

1984 में भड़के सिख विरोधी दंगों के निशान अब भी बाक़ी हैं.

84 के दंगा में जला घर
इमेज कैप्शन, 1984 के दंगों में मथुरा रोड पर आश्रम के इस घर में एक ही परिवार के चार लोगों को मकान के साथ जिंदा जला दिया गया था. तब से उजड़ा पड़ा यह मकान आज तक वीरान ही है. इस घर के वारिस हरमिंदर सिंह कहते हैं कि इस घर में उनका बचा हुआ परिवार फिर कभी वापस आकर बसने की हिम्मत नहीं जुटा पाया, क्योंकि यह घर उनके पिता कुलवंत सिंह, दादा हज़ारा सिंह, चाचा जगतार सिंह और हरमीत सिंह की याद दिलाता रहता है. (सभी तस्वीरें और कैप्शनः आरज़ू आलम)
84 के दंगों में जले ट्रक के अवशेष
इमेज कैप्शन, गुरुद्वारा दमदमा साहिब, निजामुद्दीन के वाइस चेयरमैन जो खुद इस त्रासदी के गवाह हैं, बताते हैं कि उपद्रवियों ने शालीमार सिनेमा के पीछे खड़े ट्रांसपोर्ट की पचासों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था. उसमें से एक ट्रक के अवशेष को उस त्रासदी के निशान के तौर पर संभाल कर रखा है. ज़मीन में आधे धंसे हुए इस ट्रक के कलपुर्जे अतीत की त्रासदी को बयां करते हैं.
84 के दंगे, मारुति-800
इमेज कैप्शन, ऑल इंडिया राइट विक्टिम कमेटी के चेयरमैन कुलदीप सिंह भोगल आश्रम में शालीमार सिनेमा के नजदीक खड़ी मारुति-800 के बारे में बताते हैं कि इन तीस सालों में जमाना चलता रहा लेकिन इस गाड़ी के पहिए रुके रहे. इसे कोई लेने नहीं आया, इसलिए हमने कभी इसे हटाया नहीं.
84 के दंगों में मारे गए लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र
इमेज कैप्शन, वे लोग नहीं रहें लेकिन उनके मृत्यु-प्रमाण पत्र अपने कटे-फटे, मिटे अक्षरों के साथ आज भी उनकी दास्तां कहते हैं. कल्याण पुरी के ब्लॉक-13 में रहने वाले वज़ीर सिंह और राम सिंह के मृत्यु प्रमाण पत्र.
84 के दंगों में प्रभावित त्रिलोकपुरी, दिल्ली का मकान
इमेज कैप्शन, दिल्ली के त्रिलोकपुरी के 28 ब्लॉक का यह मकान बदलते ज़माने के साथ पहले की तरह ही आज भी वैसे ही खड़ा है.
84 के दंगों में प्रभावित त्रिलोकपुरी, दिल्ली का मकान
इमेज कैप्शन, दुनिया बढ़ती रही बदलती रही लेकिन त्रिलोकपुरी ब्लॉक-36 में सरदार बंता सिंह का यह मकान बीते कल को अपने में समेटा वैसा ही खड़ा है.
84 के दंगों में प्रभावित लोग
इमेज कैप्शन, बंती कौर के ससुर करमा सिंह एवं वजीरो कौर की लड़की शकुंतला कौर दंगे में मारी गई थी. रानी कौर (दाएं से प्रथम) शादी के तीसरे दिन ही विधवा हो गई थीं उनके पति आत्मा सिंह को मार दिया गया था. वह कहती हैं कि इन तीस सालों में उन्होंने हर दिन इंसाफ का इंतज़ार किया और उन्हें उम्मीद है कि ये इंतज़ार कभी ना कभी तो ज़रुर खत्म होगा.
84 के दंगों में प्रभावित लोग
इमेज कैप्शन, कल्याण पुरी में रहने वाली शैल कौर के ससुर हजूर सिहं दंगे की आग में जल गए, उनके साथ बिमलेश कौर एवं प्रकाश कौर (बाएं से दाएं) को तीन दशक बीत जाने के बाद आज भी सरकारी मुआवजे की आस है. बिमलेश कौर बताती हैं कि दंगों में उनके घर को लूट कर जला दिया गया था. बाद में कर्फ्यू के दिनों में पुलिस उनके घर में छह महीने तक रुकी रही थी, बावजूद इसके उन्हें मुआवजे की कोई भी रकम नहीं मिली. मुआवज़े की आस में उन्होंने आज भी दंगों से जुड़े कागज़ात संभाल कर रखे हैं.