महाराष्ट्र में चुनाव के दिन गोसीखुर्द बांध के बढ़े जलस्तर के साथ ही पाथरी गांव के लोगों की आस भी डूब गई.
इमेज कैप्शन, 15 अक्टूबर को जब महाराष्ट्र विधानसभा के लिए मतदान हो रहा था, नागपुर से सटे भंडारा ज़िले के पाथरी गांव को खाली कराया जा रहा था. गाँव को खाली करने की जल्दबाजी में बाँध प्रशासन ने मतदान करने के गाँव वालों के मौलिक अधिकार का भी ध्यान नहीं रखा.
इमेज कैप्शन, गाँव खाली कराने के लिए बाँध प्रशासन ने कोई बल प्रयोग नहीं किया, बल्कि कुछ मीटर जलस्तर बढ़ा दिया और गाँव वालों को आतंकित कर गांव खाली करा लिया. इस गांव में कोई भी मतदान केंद्र नहीं बनाया गया था.
इमेज कैप्शन, मतदान वाली सुबह बाँध का जलस्तर बढ़ा दिया गया ताकि ग्रामीण जल्दी से गाँव खाली कर दें. बाँध के पानी से कुछ मकान भी गिर गए.
इमेज कैप्शन, रामधेसू और उसका भाई हर चुनाव में मतदान करते आए थे, लेकिन इस बार गाँव खाली करने के हड़बड़ी में अपना सामान समेटने में ही व्यस्त रहे. वोट डालते भी तो कहां, गांव में मतदान केंद्र तो था ही नहीं.
इमेज कैप्शन, लीलावती जानती थी कि चुनाव का दिन है, लेकिन गाँव खाली करने का भी दिन था. लीलावती कहती हैं, "अब मुझे चुनाव, मतदान, नेता से कोई मतलब नहीं."
इमेज कैप्शन, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान लगभग सभी पार्टियों के उम्मीदवार ने मतदाताओं से उनकी स्थिति सुधारने का वादा किया था, लेकिन बाँध के बढ़ते जलस्तर का खौफ़ सभी वादों पर भारी पड़ा.
इमेज कैप्शन, जहां महाराष्ट्र में लोग विधानसभा में अपने प्रतिनिधियों को चुनने की तैयारी कर रहे थे, पाथरी के ग्रामीण बचे हुए मवेशियों के लिए चारे का प्रबंध करने में व्यस्त थे.
इमेज कैप्शन, खाली हुए टूटे घर के साथ राहुल, वह कहता है कि बड़े होने पर वो कभी भी वोट नहीं देगा. उसे लगता है कि वोट करने से कोई फ़ायदा नहीं.
इमेज कैप्शन, पाथरी गाँव में साँझ ढलने का नजारा.अब इस गाँव के लोगों के लिए कोई सुबह नहीं होगी.
इमेज कैप्शन, खाली किए गए पाथरी गाँव में बिजली के खंबो पर लटकती हुई रोशनी. इस वीराने में अब रोशनी का क्या काम?