चीन में एक परंपरा के तहत अमीर घरानों की महिलाओं के पैर बांध दिए जाते थे. देखिए कुछ तस्वीरें.
इमेज कैप्शन, जो फ़ेरल ने उन महिलाओं की तस्वीरें ली हैं जिनके पैर बांध दिए जाते थे. चीन में ऐसी महिलाओं की संख्या अब बहुत कम है.
इमेज कैप्शन, ऐसा माना जाता है कि महिलाओं के पैर बांधने की शुरुआत 10वीं सदी में सॉन्ग वंश के शासन के दौरान हुई. कुछ ही साल में ये परंपरा फैल गई. ये तस्वीर यैंग जिंग और उनके बंधे हुए पैरों की है.
इमेज कैप्शन, ये तस्वीर है ज़ाओ हुआ हॉन्ग की. बंधे पैरों को अमीर घरानों की महिलाओं का प्रतीक माना जाता था, ये जताने के लिए कि उन्हें काम करने की ज़रूरत नहीं है.
इमेज कैप्शन, 1911 की क्रांति के बाद इस प्रथा पर पाबंदी लगा दी गई. इसके बावजूद ये प्रथा ग्रामीण इलाकों में कई दशकों तक जारी रही जब तक कि उनके पैरों के बंधन बलपूर्वक हटा नहीं दिए गए जिससे उनके पैर विकृत हो गए.
इमेज कैप्शन, फ़ैरल लिखती हैं, "हालांकि इसे बर्बर समझा जाता था, ये ऐसी परंपरा थी जिससे महिलाओं को सही जीवनसाथी मिल जाता था. पुरुषों की मांएं और रिश्ता मिलाने वाले ऐसी लड़की की तलाश में रहते थे. वो मानते थे कि ऐसी लड़कियां अच्छी पत्नी साबित होंगी (आज्ञाकारी होंगी और शिकायत नहीं करेंगी)." ये तस्वीर ल्यू श्यू यिंग और उनके पति की है.
इमेज कैप्शन, बीते आठ साल में फ़ैरल ने चीन के ग्रामीण इलाकों में ऐसी 50 महिलाओं से बात की है और उनके फ़ोटो लिए हैं. इनमें से ज़्यादातर महिलाओं की उम्र 80 से 90 साल के बीच है.
इमेज कैप्शन, फ़ैरल इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए रहने एशिया ही आ गईं.
इमेज कैप्शन, फ़ैरल इस प्रोजेक्ट को जारी रखना चाहती हैं और इसे किताब की शक्ल में छपवाना चाहती हैं. उनके और फ़ोटो www.jofarrell.com पर देखे जा सकते हैं.