कोसी का क़हर और ज़िंदगी जीने का संघर्ष

बिहार के सहरसा ज़िले में कोसी नदी के उफ़ान का ख़तरा अभी टला नहीं है. राहत शिविरों की ज़िंदगी तस्वीरों में

बिहार, कोसी, बाढ़
इमेज कैप्शन, सहरसा ज़िले के शाहपुर गांव के निचले हिस्सों के कुछ इलाक़ों में पानी भर गया है और लोग अपने घर छोड़कर चले गए हैं.
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इमेज कैप्शन, सहरसा के नौवहट्टा प्रखंड से अब भी लोग बड़ी संख्या में कोसी तटबंधों से बाहर सुरक्षित स्थानों की तलाश में जा रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, कुछ इलाक़ों में कोसी के जलस्तर में कमी आने से लोगों में आशा जगी है और लोग राहत शिविरों से वापस अपने गांव लौट रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, सहरसा के मंझौल गांव के लोग अनाज इकट्ठा करके सुरक्षित स्थानों की ओर कूच कर रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, राजनपुरा के माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर में ग्रामीणों के सहयोग से भोजन बनाते शिविर कर्मी.
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इमेज कैप्शन, राहत शिविर में क्षमता से अधिक लोगों के आने से सुविधाएं कम पड़ गईं हैं. राजनपुरा के शिविर में बिछौने के लिए अपना इंतजाम करती एक बच्ची.
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इमेज कैप्शन, राजनपुरा के राहत शिविर में ग्रामीण अपने पशुओं को भी ला रहे हैं. उचित चारे और देखभाल के कारण तीन दिन में ही कई पशु बीमार पड़ गए और कई की हालत खराब है. सहरसा में एक भी पशु राहत शिविर नहीं है. डीएम ऑफ़िस इसके लिए पशुपालन विभाग पर ज़िम्मेदारी डाल रहा है.
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इमेज कैप्शन, राहत शिविरों में जाने के बजाय महिसरहो में लोग खुद ही कोसी बांध पर सड़क किनारे अपना आश्रय बनाकर रहने को मजबूर हैं.
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इमेज कैप्शन, कासिमपुर के नज़दीक कोसी तटबंध पर कम जलस्तर वाली जगह बच्चों का समूह भैंसों के साथ पानी में धमाचौकड़ी मचाता दिखा.