डेढ़ लाख किलोमीटर से भी ज़्यादा लंबा भारतीय रेलवे ट्रैक इनके कंधों पर रहता है.जानिए कैसे...
इमेज कैप्शन, एक ट्रैक मैन की नौकरी का ज़्यादा समय रेल के ट्रैक के किनारे काम करते गुज़रता है
इमेज कैप्शन, ट्रैक मैन ही अक्सर रेलवे की भारी पटरियों को उठाने का काम करते है.
इमेज कैप्शन, रामदीन बताते हैं कि उनको काम करते 20 साल हो गए और इस दौरान कई बार उनको शहर से दूर वीरान इलाक़ों में लाइन के किनारे रुकना पड़ा जहाँ पीने का पानी भी अक्सर नहीं मिलता.
इमेज कैप्शन, प्वॉइन्ट मैन का काम करने वाले प्रसाद बताते हैं कि रेलवे ट्रैक में पहले सारे सिग्नल मैनुअल ही काम करते थे जिसके लिये ट्रैक के पास जा कर ही उसे डाउन करना पड़ता था. पर अब काफ़ी सिग्नल ऑटोमेटिक बना दिए गए हैं.
इमेज कैप्शन, अरविंद बताते हैं कि उनका एक पैर नहीं है और उनको ट्रैक पर काम करने के दौरान परेशानी होती है पर कई बार अधिकारियों से बात करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई.
इमेज कैप्शन, काम के दौरान अक्सर ट्रेन का आना जाना रहता है और बहुत सावधानी रखनी होती क्योंकि एक ग़लती के कारण हज़ारों ज़िंदगियाँ ख़तरे में पड़ सकती हैं.
इमेज कैप्शन, बच्चीलाल लाल बताते हैं कि अब मशीनों के उपयोग ने काम को आसान कर दिया है पर ट्रैक पर काम करने लिए गर्मी, बरसात और ठंड हर मौसम का सामना अभी भी करना होता है.
इमेज कैप्शन, अभी भी छोटे स्टेशनों पर ट्रैक को हाथ से ही बदला जाता है जबकि बड़े स्टेशनों पर ट्रैक ऑटोमेटिक ही बदले जाते हैं.
इमेज कैप्शन, ट्रैक पर लगे हर बोल्ट को चेक करना भी ज़रुरी होता है जिसके लिए समय समय पर रख-रखाव किया जाता रहता है.
इमेज कैप्शन, अब्दुल बताते हैं कि जब भी रेलवे की उपलब्धि की बात होती है तो उनके काम के योगदान की कोई बात नहीं करता जबकि रेल को आगे बढ़ाने में ट्रैक मैन का बड़ा योगदान होता है. (सभी तस्वीरें: अंकित श्रीनिवास)