अमृता शेरगिल की अनोखी ज़िंदगी

भारत की सबसे मशहूर आधुनिक महिला कलाकारों में से एक अमृता शेरगिल की याद में उनकी ज़िंदगी और काम पर मुंबई में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया.

अमृता शेरगिल, ब्रह्मचारीज़
इमेज कैप्शन, अमृता शेरगिल के जन्म शताब्दी समारोह की समाप्ति को ध्यान में रखते हुए नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) मुंबई में 'अमृता शेरगिल, दि पैशनेट क्वेस्ट एक्ज़ीबिशन' का आयोजन किया गया है. तस्वीर में मार्च 1937 में बनाई गई उनकी पेंटिंग- ब्रह्मचारीज़.
अमृता शेरगिल, सेल्फ़ पोट्रेट
इमेज कैप्शन, अमृता शेरगिल की पेंटिंग्स हमें एक ऐसी महिला की ज़िंदगी की झलक दिखाती हैं जो अपने समय से कहीं आगे और काफ़ी परंपराओं से अलग चलती थी. तस्वीर में साल 1930 में बनाया गया अमृता शेरगिल का सेल्फ़ पोट्रेट
अमृता शेरगिल की पेंटिंग- ब्राइड
इमेज कैप्शन, एक महीना चलने वाली इस प्रदर्शनी को अमृता शेरगिल की बायोग्राफ़ी की लेखिका और कला इतिहासकार यशोधरा डालमिया ने क्यूरेट किया है. तस्वीर में जुलाई 1940 में बनाई गई पेंटिंग- ब्राइड
अमृता शेरगिल, ब्राइड्स टॉयलेट
इमेज कैप्शन, इस प्रदर्शनी में शेरगिल की 95 पेंटिंग्स रखी गई हैं. इन्हें चार हिस्सों में बांटा गया है- थ्रीशोल्ड, आइकन एंड आइकोनोक्लास्टिक, हंगेरियन मैनिफ़ेस्टेशन और इंडियन जर्नी. अप्रैल 1937 में बनाई गई पेंटिंग- ब्राइड्स टॉयलेट
अमृता शेरगिल, सेल्फ़ पोट्रेट
इमेज कैप्शन, प्रदर्शनी में उनके कुछ सेल्फ़ पोट्रेट्स भी हैं, जिनमें वह कहीं चिंतित तो कहीं उत्तेजित नज़र आती हैं. यशोधरा कहती हैं, "उनका एक सेल्फ़ पोट्रेट जिसमें उन्होंने ऑफ़ शोल्डर, डीप नेकलाइन वाला लिबास पहना है, वह मुझे बेहद पसंद है. क्योंकि वह जैसे उनकी शैली का टर्निंग पॉइन्ट है." साल 1930 में बनाया गया अमृता शेरगिल का सेल्फ़ पोट्रेट
अमृता शेरगिल, टू मेंडिकेंट्स
इमेज कैप्शन, भारत आने के बाद उनके कैनवास पर सांवली त्वचा के लोग, स्थानीय संस्कृति दिखने लगी, पश्चिम का प्रभाव कम होता गया. तस्वीर में साल 1935 में ही बनाई गई पेंटिंग- टू मेंडिकेंट्स
अमृता शेरगिल, ग्रुप ऑफ़ थ्री गर्ल्स
इमेज कैप्शन, यशोधरा कहती हैं कि पेंटिंग थ्री गर्ल्स भी बेहद ख़ास है क्योंकि 1936 में इस पेंटिंग को बॉम्बे आर्ट सोसायटी का गोल्ड मेडल मिला था. 78 साल बाद यह पेंटिंग इस प्रदर्शनी में रखी गई है. तस्वीर में जनवरी 1935 में बनाई गई पेंटिंग- ग्रुप ऑफ़ थ्री गर्ल्स
अमृता शेरगिल, मदर इंडिया
इमेज कैप्शन, साल 1913 में बुडापेस्ट में जन्मी शेरगिल की मां हंगेरियन और पिता पंजाबी थे. 16 साल की उम्र में शेरगिल ने अपने समय के सबसे प्रतिष्ठित आर्ट स्कूल- इकोल नेशनल डेस ब्यू आर्ट्स में प्रवेश लिया था. अपनी ख़ुद की शैली को लेकर सजग अमृता ने कहा था, ‘भले ही योरोप गोंगें, मेटीस और बार्कका है लेकिन भारत सिर्फ़ मेरा है.’ तस्वीर में जून 1935 में बनाई गई पेंटिंग- मदर इंडिया
अमृता शेरगिल, टू एलिफ़ेंट्स
इमेज कैप्शन, आम लोगों की ज़िंदगी, संघर्ष, रोमांच से आकर्षित शेरगिल ने अपनी ज़िंदगी खुली किताब की तरह रखी और उसी के रंग से अपने कैनवास की ऊर्जा को क़ायम रखा. एनजीएमए में यह प्रदर्शनी जून के अंत तक लगी रहेगी. तस्वीर में साल 1940 में बनाई गई अमृता शेरगिल की पेंटिंग- टू एलिफ़ेंट्स
अमृता शेरगिल, दि लास्ट अनफ़िनिश्ड पेंटिंग
इमेज कैप्शन, यशोधरा डालमिया के अनुसार इस एक्ज़ीबिशन में ऐसी कई कृतियां है जो पहले कहीं देखी नहीं गईं. ऐसे काम जो शेरगिल ने 16 साल की उम्र में पेरिस में किए थे. उनकी आख़िरी-अधूरी पेंटिंग भी यहां मौजूद है. नवंबर 1941 की यह अधूरी और अंतिम पेंटिंग है- दि लास्ट अनफ़िनिश्ड पेंटिंग