सोवियत साम्राज्य के खंडहर

यूक्रेन में सोवियत काल के विशाल कारख़ाने, रेलवे स्टेशन और क़स्बे तंगहाल हो चुके हैं. इन्हें देखकर इनका भव्य इतिहास याद आता है.

दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, युवा पत्रकार वाल्यारिया मायरोनेंको पूर्वी य़ूक्रेन के अलशेव्स्क इलाक़े से तीन साल पहले अमरीका चली गई थीं, लेकिन उनका परिवार दोनबास में ही रुका रहा. अपने एक दौरे में उन्होंने यहाँ के औद्योगिक इलाक़े की ज़िंदगी को कैमरे में क़ैद करने की ठानी.
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, मायरोनेंको बताती हैं कि काम के सिलसिले में युवा बड़े शहरों में पलायन कर जाते हैं और इलाक़े की गतिविधियों के केंद्र में बुज़ुर्ग आबादी सबसे आगे होती है. उनका कहती हैं, ''वो चुनाव के दौरान मतदान करते हैं, रैलियों में सक्रिय भागीदारी करते हैं और समाचार पर नज़र रखते हैं. यही कारण है कि इस इलाक़े का भविष्य 1950 और 60 के दशक की पीढ़ी निर्धारित करती है.''
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, यह तस्वीर अलशेव्स्क की एक वृद्ध महिला के फ़्लैट की है. यहां दीवार पर हाथ से लिखी गईं बातें लोगों के टेलीफ़ोन नंबर हैं. इस पूरे ब्लॉक में इस महिला के घर में ही चालू हालत में लैंडलाइन फ़ोन है. इसलिए जब भी एंबुलेंस बुलाना होता है या किसी को फ़ोन करना होता है तो पड़ोसी यहीं आते हैं और वे उन नंबरों को इस दीवार पर लिख देते हैं.
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, अधिकांश फ़्लैट बहुत पुराने हैं और उनकी मरम्मत नहीं हुई है. इस व्यक्ति का फ़्लैट अख़बार और विज्ञापन के काग़ज़ों से संवारा गया है. कमरे को गर्म रखने के लिए खिड़कियों पर प्लाईवुड लगाया गया है. दोनबास में जाड़े के दौरान बर्फ़ नहीं पड़ती, लेकिन जमा देने वाली ठंड होती है.
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, कभी यह इमारत अलशेव्स्क की सबसे ख़ूबसूरत इमारत हुआ करती थी. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी के युद्ध बंदियों द्वारा बनाया गया यह कई स्क्रीन वाला एक सिनेमाहाल था. इसकी ख़ास बात यह है कि इसके केंद्रीय कक्ष में स्टालिन का एक आदमक़द चित्र बना था जिससे ऐसा आभास होता है कि सोवियत नेता सीढ़ियों से बस उतरने ही वाले हैं. अब यह सिनेमाहाल जीर्णशीर्ण हालत में पहुंच गया है.
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, दोनबास के हर रेलवे स्टेशन के पास एक कारख़ाना और छोटा क़स्बा ज़रूर होता है. सोवियत ज़माने के ये विशाल निर्माण वाकई प्रभावित करने वाले हैं. कुछ तो किसी शहर से भी बड़े हैं. इन कारख़ानों के अधिकांश हिस्से इस्तेमाल में नहीं हैं. जब पूरा कारख़ाना बंद हो गया तो इसके आसपास बसे क़स्बे की ज़िंदगी भी मंद पड़ती गई.
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशकों की यह कोयले की खदान अभी भी चालू है. मायरोनेंको कहती हैं, ''खनिकों का कहना है कि एक वैध कोयले की खदान की अपेक्षा कोपांका (दक्षिणी पोलैंड की एक काउंटी) में काम करना अभी भी बेहतर है. पहली बात तो यह कि काम पाने के लिए आपको रिश्वत नहीं देनी पड़ती. आपको रोज़ काम मिलता है और आपको सतह के अधिक क़रीब काम करना होता है.''
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, वो बताती हैं, ''दोनबास की खदानें वाकई भयावह जगह होती है. अमूमन ये एक किलोमीटर गहरी होती हैं. इनमें पांच से सात किमी लंबी क्षैतिज सुरंगें होती हैं, जहां आपको ख़ुद अपने उपकरण ले जाने होते हैं.''
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, मायरोनेंको कहती हैं, ''अंदर केवल हेलमेट में लगी टॉर्च ही रोशनी का एकमात्र स्रोत होती है. खदान का वो हिस्सा जहां से कोयला निकाला जाता है वह महज 80 सेंटीमीटर ऊपर होता है और यहां आपको हर रोज़ जाना होता है.''
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, यहाँ के अधिकांश उपकरण बहुत पुराने हैं और आगे खुदाई जारी रखने के लिए इन्हें और उन्नत किए जाने की ज़रूरत है.
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, कर्मचारियों का कहना है कि खदान की अपेक्षा भट्ठी ज़्यादा भयावह है. खदानों में तो शांति होती है, जबकि भठ्ठी में पिघलते कच्चे लोहे का बहुत शोर होता है.
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, तस्वीर में दिख रही भठ्ठी पूर्व सोवियत संघ की सबसे बड़ी भठ्ठियों में से एक है. मायरोनेंको कहती हैं कि जब आप अंदर होते हैं तो आपका चेहरा वाक़ई जल रहा होता है.
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इमेज कैप्शन, अलशेव्स्क में स्थित यह कोयला कारख़ाना और ज़्यादा ख़तरनाक है. इससे निकलने वाले विकिरण के अरावा अन्य कई ऐसे कारक हैं जो कर्मचारियों की सेहत के लिए नुक़सानदायक होते हैं. लेकिन कारख़ाने के कर्मचारियों को विभिन्न सुविधाएं दी जाती हैं और उन्हें रहने के लिए जगह मुहैया कराई जाती है.
दोनबास की ज़िंदगी
इमेज कैप्शन, मायरोनेंकों कहती हैं, "हालांकि दोनबास की ज़िंदगी देखने में उतनी आसान नहीं लगती. लेकिन यहां के निवासियों को यह तस्वीर स्थिरता की परिचायक लगती है, जिसका इस इलाक़े में बहुत ऊंचा मान है. (सभी तस्वीरें वाल्येरिया मारोनेंको द्वारा ली गईं हैं. कैप्शन वाल्येरिया मायरोनेंको और रोमन लीबेड द्वारा)