नज़ारे नमक के

फोटोग्राफर सर्गेई अनाशकेविच ने ट्रेन में सफ़र करते हुए पहली बार इन नज़ारों को देखा और तभी फैसला किया कि वो इस रंग बिरंगे इलाके की पड़ताल करेंगे.

क्राईमिया के नमक के मैदान
इमेज कैप्शन, फोटोग्राफर सर्गेई अनाशकेविच ने क्राईमिया क्षेत्र में पड़ने वाली इन नमक की खदानों को पहली बार ट्रेन में सफर करते हुए देखा और तभी फैसला किया कि वो इस रंग बिरंगे इलाके की पड़ताल करेंगे.
क्राईमिया के नमक के मैदान
इमेज कैप्शन, पानी का ये लाल रंग हैलोबैक्टीरिया नाम के शैवालों की वजह से है जो अत्यधिक नमकीन पानी के संपर्क में आने पर बहुत तेज़ी के साथ फैलते हैं.
क्राईमिया के नमक के मैदान
इमेज कैप्शन, हैलोबैक्टीरिया का संबंध जीवाणु जैसे एक अलग तरह के जीवधारियों से है जिन्हें अर्किया कहते हैं.
क्राईमिया के नमक के मैदान
इमेज कैप्शन, जब ये इलाका सोवियत संघ का हिस्सा था तो नमक की इस खदान से रासायनिक उद्योग में इस्तेमाल होने के लिए खारा पानी निकाला जाता था.
क्राईमिया के नमक के मैदान
इमेज कैप्शन, सोडियम क्लोराइड यानी आम इस्तेमाल का नमक, एक बहुत ही उपयोगी कच्ची सामग्री है. इससे कई अन्य महत्वपूर्ण पदार्थ निकाले जा सकते हैं, जिनमें क्लोरीन, हाइड्रोजन और सोडियम हाइड्रॉक्साइड शामिल हैं.
क्राईमिया के नमक के मैदान
इमेज कैप्शन, अब भी लकड़ी के बड़े बड़े टुकड़े ऐसी उत्पादन इकाइयों में देखे जा सकते हैं जहां अब काम नहीं होता. ये क्षेत्र क्राइमिया प्रायद्वीप में हैं जिसे अपने दलदल वाले इलाकों के लिए जाना जाता है.
क्राईमिया के नमक के मैदान
इमेज कैप्शन, अनाशकेविच का कहना है, "यहां की हवा में बहुत नमी है और वो बहुत नमकीन है. चूंकि हवा में नमक है इसलिए आपको वो बहुत चिपचिपी लगती है."
क्राईमिया के नमक के मैदान
इमेज कैप्शन, उनका कहना है, "सब कुछ हल्की सी परत से ढक जाता है. त्वचा, कपड़े, सामान - सब कुछ. लेकिन समस्या है सिर्फ गंध की, जिसे आप खुशगवार तो नहीं कह सकते हैं."