कल चमन था, अब उजड़ा दयार

सीरिया के ख़ाली हो गए शहर होम्स में नागरिक फिर से दोबारा वापस होने लगे हैं. एक समझौते के तहत विद्रोहियों का गढ़ माना जाने वाला शहर ख़ाली हो गया था.

होम्स सिटी, सीरिया
इमेज कैप्शन, जंग से तकरीबन बर्बाद हो चुके सीरिया के होम्स शहर में हज़ारों लोग पहली बार घर वापस लौट रहे हैं. शनिवार को उनकी वापसी की शुरुआत लगभग दो सालों के बाद शुरू हुई. विद्रोहियों ने इस शहर में सरकार समर्थक सेनाओं के सामने समर्पण कर दिया है.
होम्स सिटी, सीरिया
इमेज कैप्शन, और इसके बाद से ही सीरियाई नागरिक इस शहर में लौटने की योजना बना रहे हैं. मर्दों, औरतों और बच्चों का शहर के टूटे फूटे पुराने घरों की ओर लौटना जारी है. कुछ लोग छोटे ट्रकों में लौट रहे थे तो कुछ साइकिलों में और ज्यादातर लोग तो पैदल ही होम्स का रुख किए हुए थे.
होम्स सिटी, सीरिया
इमेज कैप्शन, होम्स के शहरियों को अपने घरों में सफाई करनी है. गंदे हो चुके कपड़ों, धूल और गर्द से सने गद्दों और जले हुए गैस के कनस्तरों को प्लास्टिक बैग में भर उन्हें घरों से दूर फेंक दिया. कुछ लोगों का कहना है कि विद्रोहियों ने उनके घर लूट लिए और जला दिए. शुक्रवार को भी कुछ लोगों का होम्स आना हुआ था.
होम्स सिटी, सीरिया
इमेज कैप्शन, लंबे अर्से बाद घर लौटे ये लोग यहीं रुकना चाह रहे हैं और इसके लिए वे अपने आशियाने की सफाई कर रहे हैं. उन्हें काँच के टुकड़े हटाते हुए और कचरे की सफाई करते हुए देखा जा सकता है. बुधवार को सरकारी सुरक्षा बलों के साथ हुए समझौते के बाद विद्रोहियों होम्स शहर को खाली कर दिया था.
होम्स सिटी, सीरिया
इमेज कैप्शन, समझौते के तहत बागियों को नजदीक के उत्तरी इलाके में जाने दे दिया गया था. होम्स को विद्रोहियों के गढ़ के तौर पर देखा जाता रहा है. भारी बमबारी की वजह से ये शहर तकरीबन ढह जाने के कगार पर पहुँच गया था. यहाँ रह रहे लगभग दो हजार विद्रोहियों और आम लोगों बुरी तरह से कमजोर पड़ गए थे.
होम्स सिटी, सीरिया
इमेज कैप्शन, विद्रोहियों के साथ हुए समझौते को सीरिया के राष्ट्रपति बशर असद की जीत के तौर पर देखा जा रहा है. सीरिया में तीन जून को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और माना जा रहा है कि वे चुनाव जीत भी जाएंगे. रविवार को ही सीरिया में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अभियान औपचारिक तौर पर शुरू हो गया.
होम्स सिटी, सीरिया
इमेज कैप्शन, सीरिया के गृह युद्ध में डेढ़ लाख लोग मारे जा चुके हैं और 25 लाख से भी ज्यादा लोगों ने सीरिया के बाहर शरण ले रखी है. इस युद्ध ने सीरिया के तकरीबन सभी शहरों को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है, अर्थव्यवस्था लगभग चरमरा चुकी है और वो समाज जो कभी अपनी सहिष्णुता के लिए जाना जाता था, अब वहां लोगों की धार्मिक आस्थाओं के आधार पर नफरत फैलने की आसार हैं.